अखिलेश यादव ने आजमगढ़ से नामांकन किया

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समाजवादी पार्टी(सपा) के अध्यक्ष और आजमगढ़ लोकसभा सीट से गठबंधन प्रत्याशी अखिलेश यादव ने गुरुवार को अपना नामांकन दाखिल किया। इस दौरान सपा महासचिव बलराम यादव, बसपा महासचिव सतीशचन्द्र मिश्रा, प्रदेश अध्यक्ष आर.एस. कुशवाहा, पूर्वाचल प्रभारी घनश्याम चंद खरवार भी मौजूद रहे।

अखिलेश यादव एक विशाल काफिले के साथ कलेक्ट्रेट पहुंचे, जहां उन्होंने मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय में जाकर अपना नामांकन दाखिल किया। उन्होंने इस दौरान पत्रकारों से कहा, “जनता जागरूक हो गई है। इसलिए पहले और दूसरे चरण के मतदान में वोटों की बारिश हो रही है। इसी तरह से वोटों की बारिश आगे भी होगी। यह बारिश समाजवादी धरती आजमगढ़ पर भी होगी।”

अखिलेश ने कहा, “मुझे उम्मीद है कि आजमगढ़ में सपा-बसपा द्वारा किए गए कामों के आधार पर गठबंधन जीतेगा। भाजपा को बताना पड़ेगा कि उन्होंने देश और प्रदेश में क्या काम किया है? भाजपा को पांच सालों का नहीं, बल्कि सात सालों का हिसाब देना होगा।”

गौरतलब है कि आजमगढ़ से 2014 में अखिलेश के पिता मुलायम सिंह यादव सांसद थे। इस बार यहां से अखिलेश स्वयं चुनाव लड़ रहे हैं। भाजपा ने उनके खिलाफ भोजपुरी फिल्म स्टार दिनेश लाल यादव निरहुआ को प्रत्याशी बनाया है।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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