अजा एकादशी 2020: यहां पढ़ें अजा एकादशी की पूरी व्रत कथा

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हिंदू धर्म में एकादशी तिथि का विशेष महत्व होता हैं यह तिथि जगत के पालनहार श्री विष्णु की प्रिय तिथियों में से एक मानी जाती हैं इस दिन जातक व्रत उपवास कर भगवान विष्णु की पूरे विधि विधान से पूजा अर्चना करते हैं तो आज हम आपके लिए एकादशी व्रत की पूरी कथा लेकर आए हैं तो आइए जानते हैं।

कुंतीपुत्र युधिष्ठिर ने कहा, हे भगवान भाद्रपद कृष्ण एकादशी का क्या नाम हैं इस व्रत की माहात्मय कृपा और विधि कहिए। इस पर मधुसूदन ने कहा कि भाद्रपद कृष्ण एकादशी का नाम अजा हैं यह एकादशी हर तरह के पापों का नाश करने वाली हैं इस दिन भगवान विष्णु की पूजा आराधना की जाती हैं ऐसा कहा जाता हैं कि जो लोग इस दिन भगवान ऋषिकेश की पूजा करते हैं उन्हें वैकुंठ की प्राप्ति होती हैं और अब जानिए एकादशी की व्रत कथा।

पुराने समय में एक चक्रवर्ती राजा थे जिनका नाम हरिशचंद्र था। किसी कर्म के वशीभूत होकर राजा हरिशचंद्र ने अपना सारा राज्य, धन, स्त्री, पुत्र और स्वंय को बेच दिया। वह चांडाल का दास बन गया था। और वो सत्य को धारण करता हुआ मृतकों का वस्त्र ग्रहण करने लगा। वह किसी भी तरह से सत्य से विचलित नहीं हुआ। वो कई बार इस सोच में पड़ जाता था कि वो कहा जाएं या क्या करें जिससे सब ठीक हो जाए और उसका उद्धार हो। इसी तरह कई साल निकल गए। वह इसी चिंता में एक दिन बैठा हुआ था कि गौतम ऋषि आ गए। ऋषि को देखकर राजा हरिशचंद्र ने उन्हें प्रणाम किया। राजा ने ऋषि को अपनी पुरी कहानी सुनाई। यह सुनकर गौतम ऋषि ने कहा आज से ठीक सात दिनों के बाद आपके जीवन में भाद्रपद कृष्ण पक्ष की एकादशी आएगी। इसका विधि पूर्वक व्रत उन्हें करना होगा। ऋषि ने कहा कि यह व्रत करने से राजा के सभी पाप दूर हो जाएंगे। यह कहकर ऋषि अंतर्ध्यान हो गए।

जैसा ऋषि ने कहा था राजा हरिशचंद्र ने विधि पूर्वक व्रत व जागरण किया। यह व्रत करने से राजा के सभी पाप नष्ट हो गए। फूलों की बारिश हुई और स्वर्ग में बाजे बजने लगे। राजा ने अपने मृतक पुत्र को जीवित और अपनी स्त्री को वस्त्र और आभूषणों के साथ देखा। राजा को उनकी राज्य वापस मिल गया। आखिरी में राजा अपने पूरे परिवार के साथ स्वर्ग गए।

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