वायु प्रदूषण का बच्चों के मस्तिष्क विकास पर असर : यूनीसेफ

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यूनीसेफ की कार्यकारी निदेशक हेनरिटा फोरे ने आगाह किया है कि वायु प्रदूषण की विषाक्तता बच्चों के मस्तिष्क विकास को प्रभावित कर सकती है और भारत व दक्षिण एशिया में गहराते इस संकट से निपटने के लिए उन्होंने तत्काल कदम उठाने का आह्वान किया।

हाल ही में भारत का दौरा कर चुकीं फोरे ने बुधवार को कहा, “मैंने अपनी आंखों से देखा है कि बच्चे वायु प्रदूषण के भयानक परिणामों से किस तरह लगातार पीड़ित हो रहे हैं।”

उन्होंने कहा, “वायु गुणवत्ता एक संकट के स्तर पर थी। आप वायु शोधक मास्क लगाने के बाद भी विषाक्त धुंध की गंध का अहसास कर सकते हैं।”

फोरे ने कहा कि वायु प्रदूषण बच्चों पर सबसे ज्यादा असर डालता है और यह उनके जीवन को लगातार प्रभावित करता रहता है, क्योंकि उनके फेफेड़े अपेक्षाकृत छोटे होते हैं, और वे वयस्कों की बनिस्बत दोगुना तेजी से सांस लेते हैं तथा उनमें प्रतिरक्षण क्षमता की कमी होती है।

उन्होंने कहा, “यह शिशुओं और छोटे बच्चों में मस्तिष्क के ऊतक को क्षतिग्रस्त करता है और उनमें संज्ञानात्मक विकास को रोकता है, जिसका खामियाजा वे पूरे जीवन भुगतते हैं और उससे उनकी सीखने-समझने की क्षमता और भविष्य प्रभावित होता है। इस बात के सबूत हैं कि उच्च स्तर के वायु प्रदूषण में रह चुके किशोरों को अपेक्षाकृत अधिक मानसिक स्वास्थ्य की समस्याओं का सामना करना पड़ता है।”

फोरे ने कहा कि यूनीसेफ दक्षिण एशिया में 62 करोड़ बच्चों को प्रभावित कर रहे इस वायु गुणवत्ता संकट से निपटने के लिए तत्काल कदम उठाने का आह्वान करता है।

उल्लेखनीय है कि पड़ोसी राज्यों में पराली जलाए जाने के कारण पैदा हुए गंभीर पर्यावरण हालात के मद्देनजर दिल्ली के स्कूलों को मंगलवार तक के लिए बंद कर दिया गया था।

दिल्ली में रविवार को वायु गुणवत्ता सूचकांक 625 पर पहुंच गया था, जिसे अत्यंत गंभीर स्तर का माना जाता है।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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