एयर एशिया इंडिया ने डॉक्टरों को घरेलू उड़ान के 50 हजार मुफ्त टिकट दिए

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बजट एयरलाइन एयर एशिया इंडिया ‘एयरएशिया रेडपास’ पहल के तहत कोविड-19 महामारी से निपटने में उनके योगदान को देखते हुए डॉक्टरों को 50,000 मुफ्त घरेलू उड़ान टिकट मुहैया कराएगी। एयरलाइन ने एक बयान में कहा, “डॉक्टर महामारी के खिलाफ देश की लड़ाई में सबसे आगे रहे हैं और वे अपनी परवाह किए बिना लोगों की जान बचाने के लिए अथक प्रयास कर रहे हैं।”

एयरलाइन ने कहा कि डॉक्टरों को सम्मान देने की इस पहल के तहत, एयर एशिया इंडिया अपने घरेलू क्षेत्रों में डॉक्टरों को राष्ट्र के समर्थन में उनके सराहनीय प्रयासों के लिए आभार जताने के तौर पर उड़ानों में 50,000 मुफ्त सीटें देगी।

इस पहल का लाभ उठाने के लिए डॉक्टर्स अपने सम्पर्क से जुड़े विवरण, यात्रा से संबंधित ब्योरे (यात्रा की तारीख एक जुलाई से 30 सितंबर के बीच की होनी चाहिए), अपने रजिस्ट्रेशन नंबर या पहचान पत्र एयरलाइन की वेबसाइट पर सबमिट कर सकते हैं। इस छूट को प्राप्त करने के लिए आवेदन जमा करने की आखिरी तारीख 12 जून है।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस

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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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