Sasikala के राजनीति छोड़ने के फैसले पर अन्नाद्रमुक को संशय

0

अन्नाद्रमुक नेतृत्व को वी.के. शशिकला के अचानक सक्रिय राजनीति से हटने के फैसले पर संशय है। अन्नाद्रमुक के एक वरिष्ठ नेता ने नाम जाहिर न करने की शर्त पर आईएएनएस को बताया, “शशिकला धूम-धड़ाके के साथ आई थीं और बंगलुरु से चेन्नई तक वाहनों का काफिला इस बात का सबूत था कि वह राजनीति में कितनी गंभीरता से आना चाहती थीं। अचानक सक्रिय राजनीति छोड़ने का उनका फैसला इस लॉजिक को गलत ठहराता है और मुझे यकीन है कि इसके पीछे कोई चाल है।”

शशिकला और उनके भतीजे टी.टी.वी. दिनाकरन राजनीतिक प्रक्रिया में सक्रिय रूप से शामिल थे और यहां तक कि अन्नाद्रमुक विधायकों के साथ बातचीत कर रहे थे और पार्टी को विभाजित करने की कोशिश कर रहे थे। अचानक हुए निर्णय से यह संकेत मिलता है कि अगर अन्नाद्रमुक के वोट उनकी उपस्थिति के कारण बंट जाते हैं और अगर मोर्चा सत्ता खो देता है, तो शायद यह भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व के साथ अच्छा नहीं जाए। यह सिद्धांत चेन्नई के राजनीतिक हलकों में उनके अचानक फैसले के बारे में सर्कुलेट हो रहा है, क्योंकि शशिकला के खिलाफ कई आर्थिक अपराध के मामले लंबित हैं।

भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष एल. मुरुगन ने शशिकला की प्रेस रिलीज के तुरंत बाद उनके फैसले का स्वागत किया था और कहा था कि शशिकला ने उन लोगों का पक्ष नहीं लिया है जो राजनीतिक भ्रम पैदा करके सत्ता हथियाने की कोशिश कर रहे थे। इसे भाजपा के भीतर विचार प्रक्रिया के रूप में देखा जाता है और पार्टी अन्नाद्रमुक के नेतृत्व वाले मोर्चे को राज्य में सत्ता गंवाते नहीं देखना चाहती, जिसका यह हिस्सा है।

हालांकि, एक वर्ग ऐसा है, जिसकी राय है कि शशिकला के भतीजे दिनाकरन का राजनीतिक संगठन, अम्मा मक्कल मुनेत्र कड़गम (एएमएमके) थेवर समुदाय के गढ़ में अधिक से अधिक सीटों पर लड़ेगा और इन्हें जीतने की कोशिश करेगा। यह एक शक्ति केंद्र और एक दबाव समूह के रूप में पार्टी को आगे ले जाएगा और अन्नाद्रमुक को सत्ता हासिल करने के लिए इसके समर्थन की जरूरत हो सकती है।

सूत्रों का कहना है कि यह भाजपा को पसंद नहीं था, भले ही वह शशिकला के पक्ष में था और उनके (शशिकला के) समूह के अन्नाद्रमुक के साथ गठबंधन के पक्ष में था, हालांकि मुख्यमंत्री एडाप्पदी के. पलानीस्वामी और उपमुख्यमंत्री ओ.पन्नीरसेल्वम ने इसे स्वीकार नहीं किया था।

आरएसएस के विचारक और प्रसिद्ध चार्टर्ड अकाउंटेंट एस.गुरुमूर्ति अन्नाद्रमुक के साथ शशिकला गुट को जोड़ने की कोशिश करते रहे हैं, लेकिन मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री के अड़ियल रुख ने उस मिशन को विफल कर दिया है।

न्यूज सत्रोत आईएएनएस

SHARE
Previous articleथाईलैंड में Corona के 54 नए मामले
Next articleIndian industry ने हरियाणा सरकार से निजी क्षेत्र में आरक्षण कानून पर मुल्यांकन करने को कहा
बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here