टाटा मोटर्स, गल्फ ऑयल लुब्रिकेंट्स के बीच करार

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टाटा मोटर्स और गल्फ ऑयल लुब्रिकेंट्स इंडिया लिमिटेड (जीओएलआईएल) ने भारत में यात्री वाहन सेगमेंट के लिए को-ब्रांडेड लुब्रिकेंट्स लांच करने को लेकर एक करार पर हस्ताक्षर किए। इस मौके पर टाटा मोटर्स के प्रेसिडेंट (पीवीबीयू) मयंक पारीक ने कहा, “जीओएलआईएल के साथ मिलकर हम ग्राहकों को बेहतरीन गुणवत्ता के उत्पाद मुहैया करवाने को लेकर प्रतिबद्ध हैं। लुब्रिकेंट्स की गुणवत्ता अच्छी होने से वाहनों के इंजन की क्षमता में अभिवृद्धि होगी।”

गल्फ ऑयल लुब्रिकेंट्स इंडिया लिमिटेड के प्रबंध निदेशक रवि चावला ने कहा, “हम टाटा मोटर्स जैसे सम्मानित ब्रांड के साथ साझेदारी करके काफी गौरवान्वित हैं। इस साझेदारी से हमारे यात्री वाहन सेगमेंट में हमें अपनी क्षमता बढ़ाने का मौका मिलेगा। यह करार दोनों कंपनियों के लिए लाभकारी है।” इस मौके पर दोनों कंपनियों के कई अन्य अधिकारी भी मौजूद थे।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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