कान्स फिल्म फेस्टिवल में एग्नेस वरदा के पोस्टर का अनावरण हुआ

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कान्स फिल्म फेस्टिवल के आयोजकों ने दिवंगत फिल्मकार एग्नेस वरदा के एक पोस्टर का अनावरण किया है।

पोस्टर में फिल्मकार की पहली फिल्म ‘ला पॉइंटे कौर्ते’ के सेट पर से लिया गया एक शॉट दर्शाया गया है।

हॉलीवुड रिपोर्टर के अनुसार, पोस्टर के साथ वरदा का कान्स फिल्म फेस्टिवल में यह फाइनल अपीयरेंस होगा।

शॉट 1954 का है, जब वरदा 26 साल की थीं और अपनी पहली फिल्म बना रही थी। वह फ्रांस के दक्षिणपूर्व में स्थित सेटे में समुद्र तट पर एक तकनीशियन के कंधों पर खड़ी हैं और कैमरे में देख रही हैं।

फेस्टिवल के आयोजकों ने कहा, “सेट की यह तस्वीर एग्नेस वरदा के बारे में सब कुछ बता रही है – उनकी लगन, उत्साह और शरारत।” उनके पास “एक स्वतंत्र कलाकार के इंग्रीडिएंट्स थे, जिससे उन्होंने एक ऐसी रेसिपी बनाई जिसमें सुधार करना उ्न्होंने कभी बंद नहीं किया।”

वरदा का इस साल मार्च में 90 वर्ष की आयु में निधन हो गया।

न्यूज स्त्रेात आईएएनएस


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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