संघीय व्यवस्था के खिलाफ है ‘एक देश, एक चुनाव’ : माकपा

0
29

मार्क्‍सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) ने बुधवार को ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ (एक देश, एक चुनाव) के प्रस्ताव का विरोध किया। उन्होंने इसे ‘मौलिक रूप से संघीय व्यवस्था-विरोधी, लोकतांत्रिक व्यवस्था विरोधी’ बताया और इसे संसदीय लोकतांत्रिक प्रणाली की जड़ पर प्रहार करार दिया।

माकपा महासचिव सीताराम येचुरी ने यहां सर्वदलीय बैठक में दिए एक नोट में कहा कि लोकसभा और राज्य विधानसभा चुनाव एक साथ कराने के लिए सरकार को विधायिका के प्रति जवाबदेही की संवैधानिक योजना के साथ छेड़छाड़ करनी पड़ेगी।

येचुरी ने कहा, “संसद और राज्य विधानसभाओं के एक साथ चुनाव कराए जाने में शामिल तकनीकी मुद्दों के अलावा, हमारा विरोध इस तथ्य पर आधारित है कि यह मूल रूप से संघीय व्यवस्था विरोधी, लोकतांत्रिक व्यवस्था विरोधी है और संसदीय लोकतांत्रिक प्रणाली की जड़ पर हमला करता है।”

उन्होंने स्वीकार किया कि भारत द्वारा संविधान को अपनाने के बाद चुनाव वास्तव में एक साथ हुए थे।

उन्होंने कहा, “हालांकि, केंद्र सरकार द्वारा अनुच्छेद 356 के मनमाने दुरुपयोग के कारण राज्य विधानसभाओं के चुनाव आम चुनाव से अलग हो गए। यह प्रक्रिया 1959 में केरल में कम्युनिस्ट सरकार की बर्खास्तगी के साथ शुरू हुई थी।”

संविधान के तहत, यदि कोई सरकार अविश्वास प्रस्ताव पर मतदान करके या तो विधायिका का विश्वास खो देती है, या धन विधेयक पर वोट खो देती है, तो वह इस्तीफा देने के लिए बाध्य होती है। यदि कोई वैकल्पिक सरकार नहीं बन सकती है, तो सदन भंग हो जाता है और मध्यावधि चुनाव होता है।

संविधान में न तो लोकसभा के लिए और न ही राज्य विधानसभाओं के लिए कार्यकाल की कोई निश्चितता तय है।

येचुरी ने कहा, “लोकसभा या विधायिका के जीवन को लंबा खींचने का कोई भी प्रयास न केवल असंवैधानिक होगा, बल्कि यह गैर-लोकतांत्रिक भी होगा। यह उनके चुने हुए प्रतिनिधियों के माध्यम से लोगों की इच्छा है, जो प्रबल होनी चाहिए।”

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस


SHARE
Previous articleविश्व कप : आत्मविश्वास से भरी बांग्लादेश का सामना मजबूत आस्ट्रेलिया से
Next articleएईएस पर सर्वोच्च न्यायालय में जनहित याचिका पर सोमवार को सुनवाई
बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here