मंदी के बाद कौन चलायेगा दुनिया का आर्थिक पहिया

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जयपुर। वैश्विक स्तर पर चल रही मंदी ने दूनिया के आर्थिक आंकडो की श्क्ल बिगाड दी है। बडे खिलाडी गिर रहे है और जो तेज दौड रहे थे धीमा हो रहे है। ऐसे में अगले पांच साल बाद दुनिया की अर्थव्यवस्था का रुप कैसा होगा ये समझ पाना जटिल नजर आ रहा है। ऐसे में आज मुद्दा ये है कि 2022 में मंदी के बाद दुनिया के सामने कौन-कौन सी अर्थव्यवस्था उभर कर आ सकती है।

वैश्विक अर्थव्यवस्था, अंतर्राष्ट्रीय व्यापार और उच्च अनिश्चितता को रोकने वाले तनावों से तौला गया, अगले आधे दशक में अर्थव्यवस्था के व्यापक स्तर पर धीमी वृद्धि देखने की उम्मीद है।

चीन की विकास दर धीमी रहने की उम्मीद है, और निकट अवधि में वैश्विक जीडीपी वृद्धि के लिए एक छोटा चालक होगा। वैश्विक जीडीपी वृद्धि में चीन की हिस्सेदारी 2018-2019 में 32.7 प्रतिशत से घटकर 2024 तक 28.3 प्रतिशत रहने की उम्मीद है।अमेरिका, जबकि अभी भी विश्व विकास के लिए एक बड़े हिस्से का योगदान करने की उम्मीद है, भारत के बाद तीसरे स्थान पर गिरने का अनुमान है। वैश्विक वृद्धि में अमेरिका की हिस्सेदारी 20.8 तक 13.8 प्रतिशत से 9.2 प्रतिशत हो जाने की उम्मीद है, जबकि भारत का हिस्सा 15.5 प्रतिशत तक बढ़ने और इस पांच साल की अवधि में अमेरिका को ग्रहण करने का अनुमान है।

इसेके अलावा इंडोनेशिया चौथे स्थान पर रहेगा क्योंकि उसकी अर्थव्यवस्था के 2024 में 3.7 प्रतिशत की वृद्धि की उम्मीद है, 2019 में 3.9 प्रतिशत से थोड़ा नीचे समायोजन होगा।ब्रेक्सिट के बाद यूके को इसका महत्व दिखाई देगा क्योंकि इसकी अर्थव्यवस्था 2019 में विश्व विकास के एक हिस्से के रूप में नौवें से 13 वें स्थान पर गिरती है।

गौरतलब है कि आइएमएफ की रिपोर्ट ऐसे घोडों पर दाव लगा रही है जिनकी टांगों का भरोसा नही है । मुद्रा कोष के अनुसार तुर्की और पाकिस्तान जैसे देश विकास इंजन की दौड का हिस्सा होंगे जो हास्यास्पद है।

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