आखिर ट्विंकल ने क्यों कहा, मेरी सभी फिल्में प्रतिबंधित होनी चाहिए, कारण जानकर चौंक जाएंगे आप !

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लेखिका एवं निर्माता ट्विंकल खन्ना ने मजाकिया लहजे में कहा कि उन्होंने जिन फिल्मों में मुख्य अभिनेत्री के रूप में काम किया है, उन सभी फिल्मों पर प्रतिबंध लगना चाहिए, ताकि उन्हें कोई नहीं देख सके। ट्विंकल ने शुक्रवार को मुंबई में अपनी किताब ‘पायजामाज आर फॉरगिविंग’ के लॉन्च के मौके पर मीडिया से बात की। इस मौके पर उनके पति अक्षय कुमार, मां डिंपल कपाड़िया, करण जौहर, रणवीर सिंह, सोनम कपूर, बॉबी देओल, तान्या देओल, आर. बाल्की, गौरी शिंदे, माना शेट्टी और सिकंदर खेर मौजूद थे।

साल 1995 में हिंदी फिल्म ‘बरसात’ से आगाज करने वाली ट्विंकल ने असफल फिल्मों जैसे ‘इतिहास’, ‘जुल्मी’ और ‘मेला’ में काम किया। अक्षय से 2001 में शादी करने के बाद उन्होंने अभिनय की दुनिया को अलविदा कह दिया था।

यह पूछे जाने पर कि उनकी कौन सी फिल्म को अब दोबारा बनाया जाना चाहिए तो उन्होंने मजाक में कहा, “मैंने एक भी हिट फिल्म नहीं दी है। मुझे लगता है कि मेरी सारी फिल्मों को प्रतिबंधित कर दिया जाना चाहिए, ताकि कोई उन्हें देख नहीं सके।” ट्विंकल दो बच्चों आरव और नितारा की मां हैं।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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