आखिर क्यों इस संन्यासी की सुरक्षा में तैनात रहते थे 25-30 गार्ड, नाम गोल्डन बाबा

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दोस्तों, क्या आपने कभी ऐसे संन्यासी को देखा है जिसकी सुरक्षा के लिए पुलिस वाले हर समय उसके इर्द—गिर्द घुमते हो नहीं ना, क्योंकि संन्यासी का जीवन भगवान की भक्ती में लीन होता हैं और उसको इस दुनिया से कोई मतलब नहीं होता हैं मगर आज हम आपको एक ऐसे संन्यासी के बारे में बताने जा रहे हैं जिसके बारे में जानकर आप भी चौंक जाएंगे । इस संन्यासी का नाम गोल्डन बाबा हैं । गोल्डन बाबा नाम से मशहूर सुधीर मक्कड़ की जिनकी कुछ दिन पहले ही मौत हो गई हैं । गोल्डन बाबा लंबी बीमारी से जूझ रहे थे, जिनका इलाज एम्स में चल रहा था । सूत्रों के अनुसार, संन्यासी बनने से पहले गोल्डन बाबा का दिल्ली में गारमेंट्स का कारोबार हुआ करता था।

बता दें कि, सुधीर कुमार मक्कड़ को 1972 से ही सोना पहनना काफी पसंद था। गोल्डन बाबा करोड़ों रुपए के सोने के आभूषण पहनते थे, जिसके कारण वो हमेशा सुर्खियों में बने रहते थे । दिल्ली के गांधीनगर इलाके में रहने वाले लोगों के मुताबिक, गोल्डन बाबा पेशे से दर्जी थे । गांधीनगर में उनका कपड़ों का कारोबार था । लेकिन उनको कपड़ों का कारोबार उतना रास नहीं आया। इसके बाद सुधीर कुमार मक्कड़ इस काम को छोड़कर हरिद्वार चले गए और हर की पौड़ी में फूलमाला और कपड़े बेचना शुरू किया । इसके बाद वो प्रॉपर्टी कारोबार में उतर गए। इस कारोबार में पैसा कमाने के बाद उन्होंने साल 2013-14 में यह काम बंद कर दिया। इसके बाद सुधीर कुमार मक्कड़ ने दिल्ली स्थित गांधीनगर की अशोक गली में अपना आश्रम बना लिया ।

आप भी जानकर चौंक जाएंगे मगर गोल्डन बाबा की सुरक्षा के लिए हमेशा 25 से 30 गार्ड तैनात रहते थे। गोल्डन बाबा पिछले साल कांवड़ यात्रा के दौरान 16 किलो सोना पहना था, जबकि इससे पिछली कांवड़ यात्रा के दौरान वो 20 किलो सोना पहनकर कांवड़ यात्रा के लिए निकले थे ।

 

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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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