शिक्षा महोत्सव में कैरियर चुनने में सूझ-बूझ से निर्णय लेने की सलाह

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शिक्षा महोत्सव ‘जी एजुकेयर’ में छात्र, विशेषज्ञ, प्राध्यापक एक मंच पर जुटे और युवाओं की उच्च शिक्षा संबंधी आवश्यकताओं की कमी को पूरा करने पर चर्चा की, जिससे वे अपने कैरियर के संबंध में सही सूझ-बूझ के साथ निर्णय कर सकें।

नई दिल्ली के इंदिरा गांधी इन्डोर स्टेडियम में दो दिवसीय एचपी प्रजेन्ट्स जी एजुकेयर शिक्षा महोत्सव में दोनों ही दिन प्रतिभा प्रदर्शन, पैनल चर्चा, प्रदर्शनी, भारत के संगीतकारों, कलाकारों और थियेटर कलाकारों की प्रस्तुतियां जैसी गतिविधियां शामिल रहीं, जिसने मौजूदा पेशेवरों को कैरियर में आगे बढ़ने और अभिभावकों/विद्यार्थियों को अलग विकल्प तलाशने में सहयोग दिया

महोत्सव में कला और डिजाइन, संगीत, कानून, कृषि, चिकित्सा विज्ञान, आर्किटेक्च र, फैशन, फिल्म और मास कम्यूनिकेशन, इंजिनियरिंग और इवेंट मैनेजमेन्ट सहित विभिन्न विषयों को सम्मिलित किया गया था। जी एजुकेयर इसी तरह के महोत्सवों को पूरे देश में आयोजित करने जा रहा है।

महोत्सव के बारे में जी लाइव के मुख्य परिचालन अधिकारी स्वरूप बनर्जी ने कहा, “जी एजुकेयर के माध्यम से हमने युवाओं को एकत्र करने का प्रयास किया है, जो शिक्षा की दुनिया की ओर देख रहे हैं। पैनलिस्ट्स ने खरी बात कही और अपने अनुभवों को साझा किया। दिल्ली में मौजूदगी दर्ज कराने के बाद हम मुंबई और बैंगलोर में इसका आयोजन करेंगे, जो विद्यार्थियों की आवश्यकताओं पर केन्द्रित होगा।”

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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