अपनाऐं यह उपाय मिलेगा रा​हु दशा से छुटकारा

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राहु ग्रह बिना शरीर वाला ग्रह है । यह ग्रह ऐसा है जिसके पास मस्तिष्क है पर दिल नहीं इस ग्रह को दुसरों की दृष्टि का सहारा लेना पडता हैं। यह ऐसा ग्रह है ​जो किसी ग्रह की दृष्टि मिलने पर उसका रूप धारण कर लेता हैं। इसकी दशा को कुडली में अशुभ माना जाता हैं। आइए जानते है राहु दशा के समाधान के उपायों के बारे में —

आपको शनिवार के दिन काम में लिया हुआं कंबल दान करना चाहिए।

आपको सोमवार का व्रत करके भगवान शिव पर जल व धतूरे के बीज चढाने चाहिए।

कहीं पर भी बहते हुए पानी में तांबे के टुकड़े बहा देने चाहिए।

किसी नदी में लकड़ी के कोयले को प्रवाहित करें।

आपको अष्टधातु का कड़ा सीधे हाथ में पहनना चाहिए।

किसी जमादार को तम्बाकू का दान करें। आपको मूली का दान करना चाहिए

किसी काले कुत्तें को मीठी रोटियां बनाकर खिलाऐं।

आपको प्रत्येक बुधवार के दिन कम से कम चार सौ ग्राम धनिये को पानी में में बहा देना चाहिए।

आपको एक नारियल और 11 साबुत बादाम को किसी काले कपडे में बांधकर पानी में बहा दें।

आपको रोज चंदन का टीका लगाना चाहिए एवं सफेद चंदन की माला पहननी चाहिए।

हमेशा अपने पास चांदी को चौकोर टुकडा रखना चाहिए।

यदि हो सके तो किसी गरीब को बुलाकर उसे चावल का भोजन खिलाऐं।

आपको राहु दशा को दूर करने के लिए राहु मंत्र ऊँ भ्रां भ्रीं भ्रौं सः राहवे नमः का जाप करना चाहिए।

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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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