एडोब ने साइमन टेट को सौंपी एशिया प्रशांत क्षेत्र की जिम्मेदारी

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सॉफ्टवेयर प्रमुख एडोब ने बुधवार को वरिष्ठ कारोबारी नेता साइमन टेट को अपने एशिया प्रशांत (एपीएसी) संचालन के अध्यक्ष के तौर पर नियुक्त किया।

टेट ने सेल्सफॉर्स से एडोब में प्रवेश किया है, जहां उन्होंने एपीएसी के वरिष्ठ उपाध्यक्ष के तौर पर छह साल काम किया। एडोब ने अपने कार्यकाल के दौरान सभी बाजार क्षेत्रों, भौगोलिक और उत्पादों की जिम्मेदारी निभाई।

कंपनी ने एक बयान में कहा कि टेट अंतर्राष्ट्रीय एडोब के अध्यक्ष पॉल रॉबसन को रिपोर्ट करते हुए अपनी नई भूमिका के साथ पूरे क्षेत्र में व्यापार का नेतृत्व करेंगे।

रॉबसन ने कहा, मैं टीम में उनका स्वागत करने के लिए उत्साहित हूं। एपीएसी में ग्राहकों के ²ष्टिकोण से उनकी एप्रोच एडोब के लिए एकदम सही है।

टेट ने अपने 25 साल के लंबे करियर के दौरान एसएपी, डेल/ईएमसी और हमिंगबर्ड जैसे ब्रांड्स के साथ काम किया है।

एपीएसी में काम करने को लेकर टेट भी उत्साहित नजर आए। उन्होंने कहा कि वह इस पूरे क्षेत्र में बिजनेस लीडर्स के साथ काम करने के लिए उत्साहित हैं।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस

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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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