Adhik maas purnima 2020: अधिकमास पूर्णिमा आज, जानिए व्रत नियम, पूजा विधि और महत्व

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हिंदू धर्म में पूर्णिमा ​तिथि को बहुत ही खास माना जाता हैं वही अधिकमास की पूर्णिमा आज यानी 1 अक्टूबर को पड़ी हैं अधिकमास में शुक्ल की अंतिम तिथि पूर्णिमा की होती हैं धार्मिक रूप से अधिक मास की पूर्णिमा विशेष महत्व हैं। इस दिन श्री लक्ष्मी नारायण व्रत पूजन किया जाता हैं मलमास की पूर्णिमा वाले दिन पवित्र नदियों या कुंड में स्नान और दान करने का भी विशेष महत्व बताया गया हैं ऐसा कहा जाता हैं कि इस दिन व्रत रखने वाले को श्रीलक्ष्मीनारायण व्रत कथा अवश्य ही सुननी चाहिए तो आज हम आपको अधिकमास की पूर्णिमा के व्रत नियम, पूजन विधि् और महत्व के बारे में बताने जा रहे हैं तो आइए जानते हैं।

जानिए मुहूर्त—
पूर्णिमा तिथि का प्रांरभ— 30 सितंबर दिन बुधवार को देर रात में 12 बजकर 25 मिनट।
पूर्णिमा तिथि समाप्त— 01 अक्टूबर गुरुवार को देर रात 2 बजकर 34 मिनट तक।

पूर्णिमा तिथि के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान ध्यान करना चाहिए। पूजा स्थान की साफ सफाई करें पूजा के लिए एक चौकी पर आधा लाल और आधा पीला वस्त्र बिछाएं। इसके बाद लाल वस्त्र पर देवी मां लक्ष्मी और पीले वस्त्र पर श्री विष्णु की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें। अब कुमकुम, हल्दी, अक्षत, रौली, चंदन, अष्टगंध से पूजा करें। सुगंधित पीले और लाल पुष्पों से बनी माला अर्पित करें। माता लक्ष्मी को कमल का पुष्प अर्पित करें और सुहाग की सभी चीजें अर्पित करें मखाने की खीर और शुद्ध घी से बनी मिठाई से नैवेद्य लगाएं। लक्ष्मीनारायण व्रत की कथा सुनें। फिर भगवान से अपनी इच्छाएं व्यक्त करें।

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