अभिनेत्री सनाया ईरानी ने कहा, मैं एक बड़ी पशुप्रेमी हूं !

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अभिनेत्री सनाया ईरानी ने कहा कि भारतीय सिनेमा को वन्यजीव कंटेंट के लिए भी जगह बनानी चाहिए।

सोनी बीबीसी अर्थ की अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर प्रशंसित वन्यजीव श्रृंखला ‘डायनेस्टीज’ के स्क्रीनिंग के अवसर पर उन्होंने कहा, “मैं एक बड़ी पशुप्रेमी हूं और पशुओं के आस-पास रहकर काफी खुश होती हूं। इस सीरीज को बनाने के लिए निर्माताओं ने काफी समय लगाया है। मुझे लगता है कि यह जबरदस्त है। भारतीय सिनेमा को इस तरह की वन्यजीव सामग्रियों के लिए जगह बनानी चाहिए।”

उन्होंने कहा, “पशुओं, जंगलों और पर्यावरण से संबंधित सभी चीजों के बारे में जागरूकता होना महत्वपूर्ण है।”

उनके पति व अभिनेता मोहित सहगल ने कहा कि वह सनाया कि वजह से पशु प्रेमी बन गए हैं।

उन्होंने कहा, “जब हमने साथ रहना शुरू किया, हमारे पास एक पालतु कुत्ता था। मैं कह सकता हूं कि मैं अब एक एनिमल पर्सन बन गया हूं। जब भी हम छुट्टियों पर जाते हैं, हम हमेशा सुनिश्चित करते हैं कि हम चिड़ियाघर जाएं या वन्यजीवों के बारे में जानें।” ‘डायनेस्टीज’ 17 जून को सोनी बीबीएस अर्थ पर प्रसारित किया जाएगा।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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