अभिनेत्री नम्रता शिरोडकर ने मिस इंडिया जीतने के दिनों को याद किया

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Namrata Shirodkar.

अभिनेत्री नम्रता शिरोडकर ने गुरुवार को 1993 में मिस इंडिया का ताज जीतने को याद किया। उन्होंने अपने इंस्टाग्राम पर लिखा, ” उस समय का उत्साह, बटरफ्लाई, और पागलपन.ये सब उस पल के लिए था। मुझे एक जीवन में सब मिल गया है। आगे बढ़ो और इसे सार्थक बनाओ.सपना बड़ा रखो और याद रहे जो तुम कर सकते हो वो कोई और नहीं कर सकता है। यही मेरा मंत्र है। उन सभी लड़कियों के लिए जो ऐसा बनने का सपने देखती हैं उनके लिए कुछ भी असंभव नहीं है।”

इसके साथ, उन्होंने 1993 के मिस इंडिया के एक वीडियो को भी साझा किया। नम्रता ने कहा, “काफी पेचीदा सवाल किया गया था जो सदियों पहले का था। यह मेरा जवाब था .. आपका क्या होता।”

नम्रता ने 2005 में तेलुगु सुपरस्टार महेश बाबू से शादी करने के बाद मॉडलिंग और अभिनय छोड़ दिया। उनका एक बेटा गौतम और एक बेटी सितारा हैं।

न्यूज सोत आईएएनएस

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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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