अभिनेत्री मंदिरा बेदी ने कहा, अब गैंगस्टर या पुलिस के किरदार के प्रस्ताव मिलते हैं

0
87

बताया जा रहा है कि अभिनेत्री व एंकर मंदिरा बेदी 45 की उम्र में साड़ी में व्यायाम सहजता से कर लेती हैं और मैराथन में दौड़ लेती है। उनका कहना है कि वह सबसे ज्यादा फिट महसूस कर रही हैं और यह बात उन्हें दिलचस्प लगती है कि ज्यादातर उन्हें गैंगस्टर या पुलिस अधिकारी का किरदार निभाने के प्रस्ताव मिल रहे हैं।

मंदिरा ने मुंबई से फोन पर बताया, “पिछले दो सालों में मुझे या तो गैंगस्टर या फिर पुलिस अधिकारी का किरदार निभाने के प्रस्ताव मिले हैं। मैं छोटे बाल या फिटनेस जैसी चीजों से खुश हूं। लोग मुझे सिर्फ पुलिस अधिकारी या गैंगस्टर के रूप में देख सकते हैं।”

मंदिरा 1990 के दशक के टीवी धारावाहिक ‘शांति’ में घुंघराले बालों व स्वतंत्र विचारों वाली लड़की के रूप में घर-घर पहचाने जाने वाली चेहरा बन गई थीं। वह क्रिकेट शो की मेजबानी कर दर्शकों को हैरान भी कर चुकी है।

अभिनेत्री का इतने वर्षो में लुक व व्यक्तित्व में परिवर्तन शानदार रहा है। वह टीवी शो ’24’ में एक सरकारी एजेंट और तमिल फिल्म ‘अदंगैथी’ में एक पुलिस अधिकारी की भूमिका में भी नजर आईं।

मंदिरा ने कहा, “तब से मुझमें काफी बदलाव आया है।” अपनी पिछली रिलीज फिल्म ‘वोदका डायरीज’ में वह एक कवयित्री के रूप में नजर आई थीं और आगामी फिल्म ‘साहो ‘ में वह गैंगस्टर के रूप में नजर आएंगी।

मंदिरा को दौड़ना पंसद है और ‘एएसआईसीएस’ के चेहरे के रूप में वह टाटा मुंबई मैराथन में भी दौड़ी। मंदिरा ने कहा, “दौड़ अब एक बड़ी चीज बन चुकी है। लोग इसे अब ज्यादा गंभीरता से ले रहे हैं। यहां तक कि अगर मैं अपने इलाके में सुबह सात बजे निकलती हूं तो मुझे वहां 20-25 धावक नजर आते हैं। पिछले दो सालों में इसमें प्रगति देखने को मिली है..मेरे लिए दौड़ लगाना मेडिटेशन की तरह है।”

मंदिरा ने कहा कि फिटनेस के प्रति उनका झुकाव रियलिटी शो ‘खतरों के खिलाड़ी’ का हिस्सा बनने का निमंत्रण मिलने से हुआ।

उन्होंने कहा कि वह एक मजबूत प्रतिभागी बनना चाहती थीं और अच्छा करना चाहती थी, इसके लिए उन्होंने निजी प्रशिक्षक रखा और गंभीरता से व्यायाम करना शुरू कर दिया।

मंदिरा ने कहा कि अब वह पहले से कहीं ज्यादा खुद को मजबूत और फिट महसूस करती हैं और वास्तव में अच्छा महसूस करती हैं।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस


SHARE
Previous articleअभिनेता अली फजल की ‘विक्टोरिया एंड अब्दुल’ ऑस्कर जीतने से चूकी
Next article90वें एकेडमी अवॉर्ड्स : ‘डनकर्क’ ने 2 ऑस्कर जीते, जानिए इसके बारे में !
बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here