अभिनेत्री भूमि पेडनेकर ने ‘डॉली किट्टी..’ की शूटिंग पूरी की

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अभिनेत्री भूमि पेडनेकर ने आगामी फिल्म ‘डॉली किट्टी और वो चमकते सितारे’ की शूटिंग पूरी कर ली है। फिल्म में किट्टी की भूमिका निभा रहीं भूमि ने रविवार को ट्वीट किया कि वह इस ऑनस्क्रीन किरदार को बहुत याद करेंगी।

भूमि ने लिखा, “वह प्यार और आशा से भरे पागलपन के सपने देखने वालों में से है। वह अजीब है.. बहुत अजीब है, प्यार में उसका विश्वास और बेहतर करने की उसकी महत्वाकांक्षा गजब है। यह एक ऐसा किरदार है, जिसे निभाने में मुझे बहुत मजा आया। कोई संकोच और भय नहीं हुआ। किट्टी में तुम्हें याद करूंगी।”

अलंकृता श्रीवास्तव द्वारा निर्देशित फिल्म में कोंकणा सेन शर्मा भी हैं। इसमें वह डॉली की भूमिका में हैं।

भूमि ने इस यात्रा को ‘अविस्मरणीय’ बनाने के लिए फिल्म के कलाकारों और पूरी टीम का धन्यवाद भी दिया।

वह इसके अलावा अभिषेक चौबे की ‘सोनचिरैया’ में भी नजर आएंगी, जिसमें सुशांत सिंह राजपूत और मनोज बाजपेयी हैं।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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