अभिनेता ऋषि कपूर ने ब्रिटिश एयरवेज को ‘नस्लभेदी’ बताया, जानिए क्यों ?

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अभिनेता ऋषि कपूर ने कथित तौर पर ब्रिटेन में एक भारतीय यात्री और उसके परिवार को विमान से उतारे जाने के बाद ब्रिटिश एयरवेज को ‘नस्लभेदी’ करार दिया है। उन्होंने कहा कि एयरलाइन के साथ उनका खुद का अनुभव भी अच्छा नहीं रहा है।

ऋषि ने ट्वीट किया, “‘नस्लभेदी’। ब्रिटिश एयरवेज में उड़ान न भरें। बर्लिन के बच्चे की घटना सुनकर बहुत दुख हुआ। मैंने ब्रिटिश एयरवेज से यात्रा करना बंद कर दिया है। मेरे साथ एक बार नहीं बल्कि ब्रिटिश एयवेज के केबिन क्रू ने दो दो बाद भद्दा व्यवहार किया बावजूद इसके कि मैं फर्स्ट क्लास यात्री था। जेट एयरवेज और एमिरेट्स से यात्रा करें, वहां सम्मान है।”

यह घटना 23 जुलाई की है जब बर्लिन से लंदन की उड़ान भरने वाले एक भारतीय परिवार को ब्रिटिश एयरवेज फ्लाइट ने नीचे उतार दिया था।

नागरिक उड्डयन मंत्री सुरेश प्रभु ने विमानन नियामक को इस घटना पर ब्रिटिश एयरवेज से विस्तृत रिपोर्ट प्राप्त करने के निर्देश दिए हैं।

यह बात तब सामने आई जब सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के संयुक्त सचिव स्तर के अधिकारी ए. पी. पाठक के रूप में पहचाने जाने वाले यात्री ने बताया कि उन्हें और उनके परिवार को नस्लीय भेदभाव का सामना करना पड़ा।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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