अभिनेता माइकल डी. कोहेन ने कहा, हां मैं ट्रांसजेंडर हूं !

0
214

लाइव एक्शन सिटकॉम ‘हेन्री डेंजर’ और ‘द एडवेंचर्स ऑफ किड डेंजर’ में काम करने वाले अभिनेता माइकल डी. कोहेन ने एक साक्षात्कार में कहा कि बीस साल पहले उन्होंने एक महिला से पुरूष के रूप में खुद को परिवर्तित किया है।

डेडलाइन डॉट कॉम की रिपोर्ट के मुताबिक, कोहेन ने बताया कि वह अपने जन्म के वक्त ट्रांसजेंडर थे।

यह एक ऐसा समुदाय है जिसे अपने नागरिक अधिकार के लिए समाज में बहुत संघर्ष करना पड़ता है।

43 वर्षीय कोहेन का कहना है कि अपने आत्म-वर्णन के लिए उन्हें ‘ट्रांसजेंडर’ शब्द पसंद नहीं है क्योंकि उन्हें ऐसा लगता है कि यह शब्द अपने आप में पूरा नहीं है, इसमें कुछ न कुछ कमी रह गई है।

कोहेन ने कहा कि भले ही वह एक लड़की के रूप में पैदा हुए थे, लेकिन अंदर से वह हमेशा से ही एक पुरूष रहे हैं।

20 साल की उम्र से इस कनाडाई अभिनेता ने महिला से पुरूष के रूप में बदलना शुरु किया।

साल 2014 में वह हेन्री डेंजर पर श्वोज श्वार्ट्ज की भूमिका में आए। उन्होंने अपनी पहचान का खुलासा उस वक्त नहीं किया, लेकिन हालिया राजनीति ने उन्हें उस विशेषाधिकार की अनुमति नहीं दी।

कोहेन का कहना है, “मैं इसी समुदाय से संबंधित हूं और ये मेरे अपने लोग हैं।”

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस


SHARE
Previous articleCrompton ACGC-PAC07GRY कूलह को खरीद सकते हो तीन हजार से भी कम कीमत में
Next articleघर में दरिद्रता के वास का सबसे बड़ा कारण बनता है, ये गलतियां
बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here