अभिनेता कुणाल कपूर की ‘नोबलमैन’ 28 जून को रिलीज होगी

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अभिनेता कुणाल कपूर की साइकोलॉजिकल ड्रामा फिल्म ‘नोबलमैन’ 28 जून को रिलीज होगी।

वंदना कटारिया द्वारा निर्देशित, ‘नोबलमेन’ को यूडली फिल्म्स ने समर्थित किया है। फिल्म किशोरों के वर्षों के संघर्ष के बारे में बात करती है और बदमाशी (बुलिंग) के प्रासंगिक विषय से संबंधित है, जो उच्च विद्यालयों में व्याप्त है।

फिल्म्स एंड टेलीविजन सारेगामा इंडिया उपाध्यक्ष और यूडली फिल्म्स मेंनिमार्ता सिद्धार्थ आनंद कुमार ने एक बयान में कहा, “हम ऐसी फिल्में बनाने के लिए प्रतिबद्ध हैं जो हमारे सामाजिक ताने-बाने से जुड़ी हों, जो दर्शकों को आकर्षित करती हों, और साथ ही मनोरंजक भी हो।”

उन्होंने कहा, “कैमरे के पीछे वंदना और उसके सामने एक धमाकेदार कास्ट के साथ, ‘नोबलमैन’ एक रोमांचक यात्रा रही है और हम आशा करते हैं कि दर्शक इसका भरपूर आनंद लेंगे।”

कुणाल ने एक प्रतिष्ठित बोर्डिग स्कूल में एक करिश्माई नाटक शिक्षक की भूमिका निभाई है। वह अपने छात्रों को थिएटर सिखाने के अनूठे और अपरंपरागत तरीकों का उपयोग कराते नजर आएंगे।

फिल्म में सोनी राजदान और अली हाजी भी काम कर रहे हैं।

शुक्रवार को फिल्म के निमार्ताओं ने इसके पोस्टर का अनावरण किया।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस

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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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