अभिनेता दिलीप कुमार अभी भी आईसीयू में, हालत में सुधार

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दिग्गज अभिनेता दिलीप कुमार के स्वास्थ्य में सुधार हो रहा है। उन्हें यहां के लीलावती अस्पताल में निमोनिया के इलाज के लिए गहन चिकित्सा कक्ष में भर्ती कराया गया है। दिलीप कुमार के एक पारिवारिक दोस्त ने यह जानकारी दी।

दिलीप कुमार (95) को बुधवार को बांद्रा के लीलावती अस्पताल व रिसर्च सेंटर में भर्ती कराया गया। उन्हें सीने में संक्रमण की वजह से असहज महसूस करने के बाद अस्पताल ले जाया गया।

दिलीप कुमार के आत्मकथा लेखक उदय तारा नायर ने आईएएनएस से कहा, “वह आईसीयू में हैं और उनकी हालत में सुधार हो रहा है। उन्हें एंटीबॉयोटिक दी जा रही है।”

उनकी पत्नी व अभिनेत्री सायरा बानो उनके साथ हैं। देश के सबसे दिग्गज अभिनेताओं में से एक दिलीप कुमार ने ‘कोहिनूर’, ‘मुगल-ए-आजम’, ‘शक्ति’, ‘नया दौर’ व ‘राम और श्याम’ में अभिनय किया है। वह अंतिम बार सिल्वर स्क्रीन पर 1998 में ‘किला’ में नजर आए थे।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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