अर्थशास्त्रीयों के अनुसार भारत की अर्थव्यवस्था रह सकती है 5 प्रतिशत से भी कम

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जयपुर। भारतीय बाजार के अलग-अलग इन्डस्ट्री के बडे खिलाडी इस वक्त काफी बुरे दौर से गुजर रहे हैं। इसी वजह से भारत की अर्थव्यवस्था की वृद्धी दर लगातार गिरती जा रही है। लोगों की नौकरीयां जा रही हैं। ऐसे में मंदी से डरे उपभोक्ताओं की क्रय शक्ति बेहद कम हो गई है जिससे भारतीय अर्थव्यवस्था का पहिया बेहद धीमा हो गया है।

आपको बता दें, भारत की आर्थिक वृद्धि पिछली तिमाही में काफी कम हुई हैं  जिसके शुरुआती पूर्वानुमानों में इसके 5% से नीचे रहने का अनुमान भी नजर आ रहा है।

हाल ही में भारतीय स्टेट बैंक ने सितंबर में समाप्त तिमाही के लिए अपने विकास के पूर्वानुमान को 4.7 प्रतिशत से 4.2 प्रतिशत के बीच कम कर दिया। 2012 में सकल घरेलू उत्पाद डेटा के लिए नए आधार वर्ष को अपनाने के बाद से 4.2% की वृद्धि सबसे कम होगी। जून के माध्य से तीन महीनों में अर्थव्यवस्था में 5% का विस्तार हुआ।

भारतीय रिजर्व बैंक ने विकास को बढ़ावा देने के लिए इस साल ब्याज दरों में पांच बार कटौती की है, जिसमें राजकोषीय उपायों द्वारा पूरक मौद्रिक ढील के साथ, कंपनियों के लिए $ 20 बिलियन का कर कटौती शामिल है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने पिछले हफ्ते कहा था कि यह कहना जल्दबाजी होगी कि क्या मंदी खत्म हो गई है। उन्होंने कहा कि कंपनियां नए निवेश की योजना बना रही हैं, जिसमें समय लग सकता है।

गौरतलब है कि अर्थशास्त्रीयों के अनुसार भारत की अर्थव्यवस्था 5 प्रतिशत से भी कम रहती तो यह स्थिती और भी गंभीर हो सकती है। भारत सरकार काफी प्रयास कर चुकी है और काफी राहत जारी कर चुकी है मगर उसके बाद भी स्तिथी में किसी तरह का कोई परिवर्तन नहीं आ रहा है।

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