सोच समझकर रखें घर आने वाले नन्हे मेहमान का नाम, भूलकर भी ये नाम ना रखें बच्चे के

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जयपुर । घर में संतान के जन्म के साथ कई खुशियां आती है, इसके साथ ही एक विचार हम सभी के मन में आता है कि इसका नाम क्या रखें। ऐसा माना जाता है कि नाम का जीवन में गहरा प्रभाव पडता है। हर माता-पिता चाहते हैं कि उनके बेटे या बेटी का नाम ऐसा हो जो सकारात्मक हो। वैसे तो अक्सर हम पौराणिक पात्रों (राम, कृष्ण, अर्जुन आदि) के नाम के आधार पर बच्चों का नाम रखते है। लेकिन  पुराणों में कई ऐसे चरित्र भी हैं, जिनका नाम पर बच्चों का नाम नहीं रखना चाहिये। इस लेख में हम आपके लिये कुछ ऐसे पात्रों के नाम लेकर आ रहें हैं, जिनके नाम पर बच्चों के नाम नहीं रखने चाहिये। क्योंकि इन नामों के साथ कहीं-कहीं न अपशकुन भी जुड़े हुए हैं।

विभीषण – विभीषण का अर्थ जिसे कभी क्रोध ना आता हो। इतने सुंदर अर्थ होने के बाद भी अपने बच्चे का नाम विभीषण ना रखें क्योंकि उन्होंने अपने भाई रावण की मृत्यु का रहस्य श्रीराम को बताया था। इसलिए उन्हें घर का भेदी भी कहा जाता हैं।

द्रौपदी – द्रौपदी सुंदर राजकुमारी होने के बाद अपनी बेटी का नाम द्रौपदी नहीं रखना चाहिए। इसके पीछे का कारण हैं कि द्रौपदी को पांच पांडवों के साथ विवाह करना पड़ा था।

मंदोदरी– मंदोदरी अच्छे स्वभाव वाती दयालु व अच्छे गुणों वाली स्त्री होने के बाद भी यह नाम नही रखा जाता, क्योंकि मंदोदरी रावण की पत्नी थी।

सुग्रीव– भगवान राम का परम भक्त होने के बाद भी यह नाम बच्चों का नहीं रखा जाता क्योंकि यह अपने भाई की मृत्यु का कारण बना।

अश्वत्थामा – अश्वत्थामा साहसी और बहादुर योद्धा होने के बाद भी अपने कुछ बुरे काम के कारण श्रीकृष्ण से मिले श्राप के कारण कई सदियों से पीड़ा झेलने रहें हैं। जिस कारण कोई भी अपने बच्चे का नाम अश्वत्थामा नहीं रखता।

गांधारी– गांधारी महान शक्तियों और गुणों वाली महिला थी, लेकिन विवाह के बाद उसे हमेशा दुखों का सामना किया। उसके सौ के सौ पुत्रों की मृत्यु हो गई, इसलिए कोई भी अपनी बेटी का नाम गांधारी नहीं रखता।

कैकेयी– कैकेयी ने नौकरानी की सलाह पर अपने ही परिवार के सदस्यों में भेद-भाव किया और राम को चौदह वर्ष के लिये वनवास पर भेजा। इसलिए आज भी कैकेयी नाम नहीं रखा जाता।

 

 

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