एबीवीपी के अधिवेशन में भारत को विश्वगुरु बनाने पर होगा मंथन

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अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद(एबीवीपी) का 65वां राष्ट्रीय अधिवेशन 22 से 25 नवंबर को उत्तर प्रदेश के आगरा में आयोजित हो रहा है। संगठन के ब्रज प्रांत की ओर से इस आयोजन की तैयारियां चल रही हैं। अधिवेशन की तैयारियों के बीच ब्रज प्रांत के आगरा में नए कार्यालय का बीते दिनों राष्ट्रीय संगठन मंत्री सुनील आंबेकर उद्घाटन कर चुके हैं। संगठन पदाधिकारियों का कहना है कि 22 से 25 नवंबर के बीच होने वाला यह बड़ा आयोजन भारत को फिर से विश्वगुरु बनाने के संकल्प को और मजबूत करेगा।

आगरा कॉलेज में आयोजित होने जा रहे चार दिवसीय अधिवेशन में दो हजार छात्र-छात्राओं, शिक्षाविदों के भाग लेने की बात कही जा रही है।

संगठन से जुड़े एक पदाधिकारी ने आईएएनएस को बताया, “श्रीकृष्ण की धरती(ब्रज प्रांत) पर वर्ष 1987 के बाद दूसरी बार यह आयोजन होने जा रहा है। इस चार दिवसीय अधिवेशन में विभिन्न सामाजिक, शैक्षिक एवं राष्ट्रीय विषयों पर चर्चा होगी।”

राष्ट्रवाद की भावना से ओतप्रोत विद्यार्थियों को जोड़ने के लिए संघ से जुड़े छात्र संगठन एबीवीपी की स्थापना नौ जुलाई, 1949 को हुई थी।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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