अभिजीत भट्टाचार्य के गानों पर झूम उठे युवा

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जयपुरिया ग्रुप के तीसरे ‘अल्युम्नी मीट’ में बीते दिनों की सुनहरी यादों को ताजा करने के लिए 400 पूर्व विद्यार्थियों ने शिरकत किया। इस मौके पर अभिजीत भट्टाचार्य के लाइव परफॉर्मेस एवं गानों पर युवा झूम उठे। जयपुरिया ग्रुप ऑफ एडुकेशनल इंस्टीट्यूशंस के पूर्व विद्यार्थियों के लिए जयपुरिया ग्रुप का तीसरा ‘अल्युम्नी मीट’ 2018 बीते दिनों की सुनहरी यादें ताजा करने का शानदार अवसर रहा। पूर्व विद्यार्थियों के मिलन समारोह – ‘कनेक्शंस’ का मुख्य आकर्षण अभिजीत भट्टाचार्य का रोमांचक और लाइव परफॉर्मेस था।

इस मौके पर जयपुरिया ग्रुप के चेयरमैन शिशिर जयपुरिया ने जीवन के सभी कार्य क्षेत्रों में पूर्व विद्यार्थियों की उपलब्धियों की तारीफ की और जयपुरिया के लिए इसे गौरवूपूर्ण बताया कि वे विभिन्न सरकारी संगठनों, पीएसयू, निजी क्षेत्र के संगठनों और शिक्षा संस्थानों में उच्च पदों पर अपनी जिम्मेदारियां बखूबी निभा रहे हैं।

इस अवसर पर एल्युम्नी एसोसिएशन ने कई दिलचस्प आयोजन किए जो उपस्थिति विद्यार्थियों के लिए बेहद मनोरंजक रहे।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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