वैक्सीन निर्यात के खिलाफ ‘AAP’ का भाजपा मुख्यालय के बाहर प्रदर्शन

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आम आदमी पार्टी ने विदेशों के लिए हो रहे कोरोना वैक्सीन निर्यात के खिलाफ भाजपा मुख्यालय पर प्रदर्शन किया। इस विरोध प्रदर्शन में आप के सैकड़ों कार्यकर्ता शामिल हुए और सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। प्रदर्शन को देखते हुए पुलिस द्वारा पहले से ही मुख्यालय पर बैरिकेडिंग कर आप कार्यकर्ताओं को बीजेपी दफ्तर जाने से रोका। इसके बाद ‘आप’ कार्यकर्ता भाजपा मुख्यालय के सामने सड़क पर ही बैठ गए।

आप प्रवक्ता सौरभ भारद्वाज ने कहा कि, “वैक्सीन का निर्माण हमारे देश के वैज्ञानिकों ने किया है और इस पर देश के 130 करोड़ लोगों का पहला हक है। कोरोना की वजह से काम-धंधे चौपट हो रहे हैं और लोगों की मौतें हो रही हैं, फिर भी मोदी सरकार सबको वैक्सीन देने की बजाय वाह-वाही लूटने के लिए दूसरे देशों को निर्यात कर रही है।”

“हमारी मांग है कि वैक्सीन को नियंत्रण मुक्त किया जाए और सभी को उपलब्ध कराया जाए, ताकि लोग कोरोना से बच सकें और देश की अर्थव्यवस्था को बेहतर किया जा सके।”

न्यूज सत्रोत आईएएनएस

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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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