हवाईजहाज से 180 प्रवासी मजदूरों को लेकर पटना पहुंचे आप सांसद संजय

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आम आदमी पार्टी (आप) के दिल्ली से राज्यसभा सांसद संजय सिंह गुरुवार की शाम 180 प्रवासी मजदूर यात्रियों को लेकर हवाईजहाज से पटना पहुंचे। पटना हवाईअड्डा पहुंचने पर उन्होंने कहा कि प्रवासी मजदूर ही सही में ‘राष्ट्र-निर्माता’ हैं। उन्होंने बताया कि दिल्ली में फंसे प्रवासी मजदूरों को शुक्रवार को भी दो बसों से बिहार के लिए रवाना किया जाएगा। उन्होंने कहा कि इससे पहले 42 बसों से प्रवासी मजदूरों को दिल्ली से उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और बिहार भेजा जा चुका है।

उन्होंने कहा, “ये प्रवासी मजदूर ही राष्ट्र-निर्माता हैं, लेकिन इन्हें अंतिम पायदान पर रखा गया है। सही समय पर उन्हें उनके घर तक नहीं पहुंचाया गया।”

उन्होंने कहा कि ट्रेनों से प्रवासी मजदूरों को जब उनके घरों व गांवों तक पहुंचाया जाने लगा, तब तक काफी देर हो चुकी थी, यही वजह है कि मजदूरों के बच्चों को सूटकेस पर सोकर सफर करना पड़ा। मजदूरों के पैरों में छाले पड़ गए। इस दौरान कई मजदूरों की मौत हो गई।

उन्होंने कहा, “जान गंवाने वाले इन मजदूरों के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि यही होगी कि इस मुश्किल घड़ी में हम सब मिलकर उनके परिवार की मदद करें। उनका सहयोग करें।”

हवाईजहाज से अपने राज्य पहुंचे प्रवासी मजदूरों के चेहरे पर भी संतोष और खुशी देखी गई।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस

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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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