नए नारे के साथ शुरू हुआ आम आदमी पार्टी का चुनाव अभियान

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दिल्ली में सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी(आप) ने नए नारे ‘अच्छे बीते पांच साल, लगे रहो केजरीवाल’ के साथ ही दिल्ली में आगामी विधानसभा चुनाव के लिए प्रचार अभियान शुरू कर दिया है। पार्टी ने यहां कार्यालय में वरिष्ठ नेता मनीष सिसोदिया, संजय सिंह, गोपाल राय और दिल्ली के अन्य मंत्रियों और विधायकों की मौजूदगी में अपना अभियान शुरू किया।

पार्टी कार्यालय को एक बड़े बैनर से सजाया गया था, जिसपर अरविंद केजरीवाल की तस्वीर भी थी।

दिल्ली के मुख्यमंत्री के तौर पर केजरीवाल का कार्यकाल फरवरी 2020 में खत्म होने वाला है, ऐसे में आप आगामी चुनाव के लिए अपनी कमर कसने लगी है।

पिछले विधानसभा चुनाव से भी अधिक सीटें लाने का लक्ष्य लेकर चल रही दिल्ली की सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी प्रशांत किशोर की कंसल्टैंसी कंपनी, इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमेटी(आई-पैक) के साथ चुनाव प्रचार को लेकर आगे बढ़ रही है। यह नारा भी आई-पैक ने ही दिया है।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस

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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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