देश का एक ऐसा गांव जहां कोई नहीं करता धूम्रपान

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दोस्तों, आज के युवा धूम्रपान करने को एक नया ही फेशन मानते हैं और यदि उनके सामने कोई धूम्रपान नहीं करता है तो वो उस व्यक्ति को पागल समझते हैं । आज हम आपको एक ऐसी जगह के बारे में बताने जा रहे हैं जहां पर कोई भी व्यक्ति धूम्रपान नहीं करता है । जी हाँ… सुनकर आपको भले ही हैरान हो रही हो लेकिन ये सच है ।

आपको बता दें कि इस गांव का नाम टीकला है, जो कि हरियाणा के अंतिम छोर पर बसा और राजस्थान से सटा है । इस गांव की जनसँख्या करीब 1500 है । भले ही ये गांव छोटा हो लेकिन फिर भी यहाँ का एक भी व्यक्ति धूम्रपान और तम्बाकू से बने किसी भी उत्पाद का सेवन नहीं करता है । हैरानी वाली बात तो ये है कि गांव में अगर कोई बाहरी व्यक्ति भी आता है तो पहले उसकी तलाशी की जाती है इसके बाद ही उसे गांव में प्रवेश करने दिया जाता है । रिश्तेदार भी उनकी इस बात का बुरा नहीं मानते हैं ।

अब आप भी ये ही सोच रहे होंगे कि आखिर आखिर इस गांव में धूम्रपान करना मना क्यों है. तो चलिए हम आपको इसके पीछे का कारण बता ही देते हैं. दरअसल गांव में बाबा भगवानदास का मंदिर और उनकी समाधी बनी हुईं है. बाबा भगवानदास शुरुआत से ही तम्बाकू और उससे बने सभी उत्पादों का बहिष्कार करते थे. बाबा द्वारा कई चमत्कार भी किये गए है जिसके बाद उनके प्रति आस्था बढी और वहां पर रहने वालो ने धूम्रपान के सेवन को बंद करने का निर्णय ले लिया ।

 


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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