शिमला के रिज मैदान में पूर्व PM Atal Bihari Bajpayee की प्रतिमा होगी स्थापित

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हिमाचल प्रदेश कैबिनेट ने शनिवार को पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की मूर्ति स्थापित करने का काम स्टैच्यू ऑफ यूनिटी के मूर्तिकार को देने का फैसला लिया। पद्मभूषण और पद्मश्री से सम्मानित राम वंजी सुतार इस प्रतिमा को स्थापित करेंगे। इस मूर्ति को 30 अक्टूबर तक तैयार कर लिया जाएगा। फिलहाल इस मूर्ति के काम में 10 से 15 लोग लगे हुए हैं, जो छोटी-छोटी बारीकियों को ध्यान में रखकर मूर्ति तैयार कर रहे हैं। अटल बिहारी वाजपेयी की प्रतिमा शिमला के रिज मैदान में स्थापित की जाएगी।

प्रसिद्ध मूर्तिकार राम सुतार ने आईएएनएस को बताया, “मूर्ति 30 अक्टूबर तक बनकर तैयार हो जाएगी, फिर हम इसे हिमाचल सरकार को दे देंगे। फिलहाल इस मूर्ति में करीब 10 से 15 लोग लगे हुए हैं, जो इस पर काम को कर रहे हैं।”

“यह मूर्ति ब्रॉन्ज यानी कांसे से बनेगी और इसकी उम्र हजारों साल होगी। दरअसल कांसे में 85 प्रतिशत तांबा और बाकी टिन, जिंक और लेड होता है। इसी वजह से इसकी उम्र हजारों साल होती है। ”

प्रसिद्ध मूर्तिकार राम सुतार के बेटे अनिल राम सुतार ने आईएएनएस को आगे बताया, “पूर्व प्रधानमंत्री की इस मूर्ति से एक हसमुख स्वभाव झलकेगा, उनकी वेशभूषा, अभिवादन करने का तरीका, बात करते वक्त उनका स्वभाव, धोती पहनने का स्टाइल, उनके कुर्ते पर सिलवटे पड़ना, वहीं उनकी कई तस्वीरों को स्टडी करके हम मूर्ति तैयार कर रहे हैं।”

उन्होंने बताया, “मूर्ति बनाने में 10 स्टेप्स होंगे जैसे पहले मिट्टी की मूर्ति बनेगी, फिर प्लास्टर का मोल्ड लिया जाएगा, फिर फाइबर का इस्तेमाल होगा, दोबारा मोल्ड लेकर, इसकी एक मोम की मूर्ति बनाई जाएगी। वहीं इतना सब होने के बाद एक सांचा तैयार होगा।”

राम सुतार के बेटे ने बताया कि, “दिल्ली के शहीद पार्क का उद्घाटन पूर्व प्रधानमंत्री अटल जी करने पहुंचे थे और मेरे पिताजी के पास कोई इनविटेशन कार्ड नहीं था, जिसके बाद वहां मौजूद सुरक्षाकर्मियों ने पिताजी को अंदर जाने से रोक दिया, लेकिन सुरक्षाकर्मियों को यह नहीं पता था कि उस पार्क की मूर्तियां पिताजी ने बनाई थीं। पूर्व प्रधानमंत्री ने जब स्टेज पर पहुंचकर पिताजी का नाम पुकारा तब बाद में सुरक्षाकर्मी उन्हें स्टेज पर लेकर गए, जहां पूर्व प्रधानमंत्री ने उन्हें शॉल पहना कर सम्मानित किया था।”

दरअसल राम वंजी सुतार को ही 182 मीटर (600 फीट) की स्टैच्यू ऑफ यूनिटी बनाने का जिम्मा मिला था। मूर्तिकार राम सुतार ने दुनिया की इस सबसे ऊंची सरदार वल्लभ भाई पटेल की मूर्ति का डिजाइन तैयार किया था और बतौर मूर्तिकार मुख्य भूमिका निभाई थी। इसके अलावा उन्होंने राजनेताओं की करीब 50 मूर्तियों का निर्माण कर चुके हैं।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस

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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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