भारत की एक ऐसी जेल जहां कैदियों को गृहस्थी बसाने और काम पर जाने की दी जाती है आजादी

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जयपुर, जेल का नाम सुनते ही हमारे दिमाग में एक अजीब सा डर बैठ जाता है। हमारा दिमाग वहीं जाकर रूकता है जिसमें एक तंगहाल सी कोठरी व एक पानी की मठकी के साथ ही सोनें के लिए एक दरी मिलती है। लेकिन आज आपको एक ऐसी जेल के बारे में बताने जा रहै है। जहां कोठरी में बंद रहने वाले कैदियों को दो कमरों का नय घर दिया जा रहा है। साथ ही अपनी ग्रहस्थी बसाने की भी आजादी दी जा रही है।Image result for अहिल्याबाई जेल मध्यप्रदेश

इतना ही नहीं उनको काम करने के लिए बाहर जाने की भी छूट दी जा रही है। दरअसल यह सारा मामला मध्यप्रेदश के अहिल्याबाई खुली जेल का है जहां सजायाफ्ता कैदियों को रखा जाएगा। यहां एख कॉलोनी बसाई गई है जिसका नाम अहिल्याबाई खुली कॉलोनी रखा गया है। फिलहाल यहां पर 10 विवाहित कैदियों को स्वतंत्र अपार्टमेंट दिए गए हैं। इनमें से एक कैदी भपेंद्र सिंह ने अपनी ग्रहस्थी भी बसाई है। बता दें कि मध्य प्रदेश के शाजापुर कस्बे के निवासी भूपेंद्र को पारिवारिक विवाद में एक युवक की हत्या आरोप में 1996 में गिरफ्तार किया गया था।Image result for अहिल्याबाई जेल मध्यप्रदेश

जिसे उम्र कैद की सजा सुनाई गई थी। भपेंद्र सिंह ने बताया कि मेरी सजा पूरी होने में फिलहाल कुछ समय बाकी है। लेकिन खुली जेल में आने के बाद मुझे लग रहा है कि मेरी अभी से रिहाई हो गई है। मुझे अपने जुर्म पर पछतावा है और अब मैं आम नागरिक की तरह जीवन बिताना चाहता हूं। उसने बताया कि मुझे यहां आने के बाद काम करने की भी आजादी दी गई है।Image result for अहिल्याबाई जेल मध्यप्रदेश

इसी के चलते में  शहर में चाय-नाश्ते की दुकान खोलने की तैयारी कर रहा हूं। यह कैदी अपनी 35 वर्षीय पत्नी के साथ रह रहा है। दंपति के दो बेटे है जो बाहर पढाई कर रहे है। आरोपी की पत्नी ने बताया कि वह बरसों पति से दूर रही है औऱ इस दौरान उसने अपने बच्चों की परवरिश की है। जिला और सत्र न्यायाधीश राजीव कुमार श्रीवास्तव ने खुली जेल के प्रयोग को सराहा है।

 

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