एक शानदार कहानी – 1991 के आर्थिक संकट से भारत कैसे उबरा

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जयपुर। आपको याद है भारत में 1991 में एक आर्थिक संकट आया था। आज भी कुछ हालात ऐसे ही बनते जा रहे है। बुरी बात ये है कि उस वक्त की तरह इस बार भी हम कुछ भी नही कर पा रहे है। मगर क्या आपको पता है कि उस वक्त किस तरह से भारत ने इस स्तिथी का सामना किया है

दरअसल हुआ ये था कि अस्सी के दशक में भारत का निर्यात ठप्प पड गया और दशक के अंत तक आते आते भारत का काफी व्यापार घाटा होने लगा। सन् 1990 में भारत को लगभग 54000 करोड रुपए का व्यापारिक घाटा हुआ।

आपको बता दे कि इस आर्थिक संकट का कारण भारत का पूंजीवादी शक्तियों के साथ अच्छे संबध न होने जैसे कई कारण थे। भारत को उसी वक्त पर तेल संकट का भी सामना करना पड रहा था। भारत में राजनैतिक अस्थिरता भी चरम पर थी। ऐसे में देश आर्थिक रुप से काफी कमजोर महसूस कर रहा था।

ऐसे में इस स्थिती को आर्थिक संकट नाम दिया गया क्योंकि भारत आर्थिक रुप से काफी कमजोर हो गया था। भारत का विदेशी मुद्रा भण्डार करीब-करीब समाप्त होने वाला था। सरकार ने स्तिथी को संभालने के लिए IMF  से एक बडा कर्ज लिया, मगर इसको लौटाने का तरीका भी तो निकालना था।

1991 में सत्ता में आई नरसिम्हा राव की सरकार के वित्त मंत्री ने तब इस ट्रेजिक फिल्म के हीरो का किरदार निभाया, और देश को इस आर्थिक संकट से बाहर निकाला। इन वित्त मंत्री का नाम था मनमोहन सिंह। उन्होने कुछ कदम उठाये जिन्है एलपीजी भी कहा जाता है, इन कदमों को देश में आर्थिक सुधार कहा जाता है।

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