मिडिल स्कूल के 94 फीसद शिक्षकों में रहता उच्च तनाव

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शिक्षक और अभिभावक गौर करें! मध्य विद्यालयों के 94 प्रतिशत शिक्षक उच्च स्तर के तनाव से ग्रस्त रहते हैं, जिसका विद्यार्थियों के परिणाम पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। एक नए शोध में यह बात सामने आई है। शोध के निष्कर्ष में आगे कहा गया है कि शिक्षकों द्वारा अनुभव किया गया है कि शैक्षणिक और व्यावहारिक, दोनों रूप से शिक्षण के बोझ को कम करना छात्र की सफलता में सुधार के लिए महत्वपूर्ण है।

प्राथमिक विद्यालय के शिक्षकों के बीच तनाव का अध्ययन किए जाने पर यह बात सामने आई है कि शिक्षकों के तनाव में रहने का छात्रों के परिणाम पर नकारात्मक असर हो सकता है।

अमेरिका में मिसौरी विश्वविद्यालय से अध्ययनकर्ता कीथ हरमन ने कहा, “दुर्भाग्य से, हमारे निष्कर्षो से पता चलता है कि कई शिक्षकों को वह समर्थन नहीं मिल रहा है, जो उन्हें अपनी नौकरी के तनाव से पर्याप्त रूप से निपटने के लिए जरूरी है।”

हरमन ने आगे कहा, “यह स्पष्ट है कि शिक्षकों में तनाव छात्र की सफलता से संबंधित है, इसलिए यह महत्वपूर्ण है कि हम स्कूल के तनावपूर्ण माहौल को बेहतर बनाने के तरीके खोजें, ताकि शिक्षकों को अपनी नौकरी के दौरान परेशानी का सामना न करना पड़े।”

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस

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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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