ब्राजील में 10 महीनों में 841000 नौकरियां उपजीं

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ब्राजील के अर्थव्यवस्था मंत्रालय ने गुरुवार को कहा कि ब्राजील ने जनवरी से अक्टूबर तक 8,41,589 रोजगार सृजित किए हैं, जो वर्ष-दर-वर्ष 6.4 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है। मंत्रालय के श्रम सचिवालय के अनुसार, ब्राजील की अर्थव्यवस्था ने अक्टूबर में 70,852 नौकरियों का सृजन किया, जो 2016 के बाद से महीने के लिए सबसे अच्छा आंकड़ा है। यह लगातार सातवां महीना है, जिसमें ब्राजील में छंटनी से अधिक रोजगार मिले हैं।

समाचार एजेंसी सिन्हुआ के अनुसार, श्रम सचिवालय द्वारा विश्लेषण किए गए सभी आठ क्षेत्रों में 2019 के पहले 10 महीनों में सकारात्मक नौकरी की वृद्धि हुई, जिसमें सेवा, विनिर्माण और निर्माण के क्षेत्र शामिल हैं।

ब्राजील के भूगोल एवं सांख्यिकी संस्थान के अनुसार, नौकरियों की बढ़ती संख्या के समानांतर, तीन महीनों में सितंबर में ब्राजील की बेरोजगारी दर 0.2 प्रतिशत अंक गिरकर 11.8 प्रतिशत या पिछली तिमाही से 1.25 करोड़ हो गई है। पहली तिमाही की दर 12.7 प्रतिशत है।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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