अप्रैल, 2020 में रिलीज होगी ’83’

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1983 के क्रिकेट विश्व कप पर आधारित फिल्म ’83’ 10 अप्रैल, 2020 को रिलीज होगी। अभिनेता रणवीर सिंह इसमें मुख्य भूमिका निभा रहे हैं। फिल्म के आधिकारिक ट्विटर खाते ने गुरुवार को ट्वीट किया, “भारत के 15 वीरों ने जब विश्व क्रिकेट पर राज किया था, उस ऐतिहासिक शौर्यगाथा की याद आएगी। फिल्म 10 अप्रैल, 2020 को रिलीज होगी।”

‘रिलायंस एंटरटेनमेंट’ के बैनर तले बन रही फिल्म का निर्देशन कबीर खान कर रहे हैं। फिल्म में रणवीर सिंह स्टार क्रिकेटर कपिल देव का किरदार कर रहे हैं।

इससे पहले रणवीर ने आईएएनएस को बताया था, “’83’ एक अविश्वसनीय कहानी है। देश के इतिहास में खेल की कहानियों से एक, 1983 क्रिकेट विश्वकप से जुड़ना एक सम्मान की बात है। इस कहानी को बताना और इसे जीवंत करना सम्मान की बात है।”

’83’ में दिखाया गया है कि कैसे नवनियुक्त कप्तान कपिल देव की अगुआई में भारतीय क्रिकेट टीम ने फाइनल में वैस्ट इंडीज को हराकर 1983 का विश्व कप जीता था।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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