आजादी के 72 साल बाद भी देश में ज्योतिष को जानने समझने वाले लोगो की कमी

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जयपुर। भारतीय ज्योतिष शास्त्र जिसे पूरे विश्व में माना जाता है। इसमें अलग-अलग तरीके से भाग्य या भविष्य के बारे में बताया जाता है। ऐसा माना जाता है कि भारत में लगभग 150 से भी ज्यादा ज्योतिष विद्या प्रचलित हैं जिसके आधार पर भविष्य की जानकारी दी जाती है। ये सारे ज्योतिष के प्रकार भविष्य के बारे मे सटीक जानकारी देने का दावा करती है।

भारत जो ज्योतिषशास्त्र का जनक माना जाता है अपने ही देश में ज्योतिष विघाया के 150 से ज्यादा प्रकार होने के बाद भी इस विघा के जानकार कम ही लोग हैं।

 

आजादी के 72 साल के बाद भी हमने अपने ही देश की विरासत को सम्हाल कर नहीं रखा न ही अपने विरासत की अहमियत को कभी समझा। आज जब गैर भारतिय भी हमारी ज्योतिष विघा के इतने कायल हो रहें है इसको मानते हैं तो फिर यह विघा अपने ही देश में बेगानी क्यो बनी है।

शायद हम लोगो को यह भी नही पता होगा की ज्योतिष के कितने प्रकार है किन किन आधार पर भविष्य के बारे में जाना जा सकता है। आज इस लेख में इस के बारे मे बता रहें हैं।

  • कुंडली ज्योतिष – यह कुंडली पर आधारित विद्या है। इसके तीन भाग है- सिद्धांत ज्योतिष, संहिता ज्योतिष और होरा शास्त्र। इस में जन्म के समय में ग्रहों, तारें या नक्षत्र के आधार पर कुंडली बनाई जाती है।
  • लाल किताब की विद्या – यह भी ज्योतिष का ही प्रकार है इसमें ज्योतिष के परंपरागत सिद्धांत से हटकर व्यावहारिक ज्ञान के आधार पर  समस्या का समाधान किया जाता है।
  • गणितीय ज्योतिष – इससे अंक विद्या भी कहते हैं। इसके अंतर्गत ग्रह, नक्षत्र, राशि आदि के अंक व जन्म तारीख, वर्ष आदि को जोड़ कर भाग्यशाली अंक बता कर भविष्य के बारे में बताया जाता है।

  • नंदी नाड़ी ज्योतिष – यह दक्षिण भारत में प्रचलित ज्योतिष विद्या का ही प्रकार है इसमें ताड़पत्र के द्वारा भविष्य के बारे में जाना जाता है। इस विद्या के जन्मदाता भगवान शंकर के गण नंदी हैं को माना जाता है इस लिए इसे नंदी नाड़ी ज्योतिष विद्या कहा जाता है।
  • पंच पक्षी सिद्धान्त – यह भी दक्षिण भारत में प्रचलित ज्योतिष का प्रकार है। इस ज्योतिष सिद्धान्त के अंतर्गत समय को पाँच भागों में बाँटकर प्रत्येक भाग का नाम एक विशेष पक्षी पर रखा गया है। इसमें सिद्धांत के अनुसार जानकारी दी जाती है। पंच पक्षी सिद्धान्त के अंतर्गत आने वाले पाँच पंक्षी के नाम हैं गिद्ध, उल्लू, कौआ, मुर्गा और मोर।
  • हस्तरेखा ज्योतिष – हाथों की आड़ी-तिरछी और सीधी रेखाओं के साथ ही हाथों के चक्र, द्वीप, क्रास आदि के अध्ययन के आधार पर भविष्य के बारे में बताया जाता है।

  • नक्षत्र ज्योतिष – वैदिक समय से नक्षत्रों के आधार पर ज्योतिष विघा प्रचलित थी। इसमें व्यक्ति जिस नक्षत्र में जन्म लेता था उसके उस नक्षत्र के अनुसार भविष्य के बारे में बताया जाता था।
  • अँगूठा शास्त्र – यह विद्या भी दक्षिण भारत में प्रचलित है। इसमें अँगूठे की छाप लेकर उसका अध्ययन कर भविष्य के बारे मे बताया जाता है।
  • सामुद्रिक विद्या – यह विद्या भारत की सबसे प्राचीन विद्या है। इसके अंतर्गत व्यक्ति के चेहरे, नाक-नक्श और माथे को देख कर व शरीर की बनावट के आधार पर  अध्ययन कर भविष्य के बारे में बताया जाता है।
  • वैदिक ज्योतिष – वैदिक ज्योतिष में राशि चक्र, नवग्रह, जन्म राशि के आधार पर गणना करके व नक्षत्रों की गति के आधार पर भविष्य के बारे में बताया जाता है।

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