दिमाग की आधुनिक सर्जरी से 71 वर्षीय महिला को मिली नई जिंदगी

0
153

दिमाग की जानलेवा बीमारी से पीड़ित 71 वर्षीय इंदिरा शर्मा को नया जीवन मिला है। वह दिमाग की एक बीमारी कैरोटिड स्टेनोसिस से पीड़ित थीं, जिसमें ब्रेन आर्टरी (दिमाग को खून ले जाने वाली धमनी) में प्लॉक जमने के कारण धमनी संकरी हो जाती है। एक आधुनिक तकनीक के जरिए बिना ओपन सर्जरी के उनका सफल इलाज किया गया, ताकि दिमाग को फिर से खून की सही आपूर्ति हो सके। धमनी में मैश कवर्ड स्टेंट डालकर उन्हें जानलेवा स्ट्रोक से बचा लिया गया। इस मुश्किल प्रक्रिया को अंजाम देने वाले इंद्रप्रस्थ अपोलो अस्पताल के इंटरवेंशनल कार्डियोलोजिस्ट, डॉ. एन. एन. खन्ना ने कहा, “जब वह हमारे पास आईं, तब वह शरीर के दाएं हिस्से में बहुत ज्यादा कमजोरी महसूस कर रही थीं। पिछले 10 दिनों से उन्हें चक्कर आ रहे थे। मरीज में पहले से हाइपरटेंशन, टाईप 2 डायबिटीज की समस्या थी और उनमें कोरोनरी आर्टरी बायपास सर्जरी, इलियक स्टेंटिंग (टांग की धमनी से एंजियोप्लास्टी), परमानेन्ट पेसमेकर इन्सटॉलेशन किया जा चुका था। ऐसे में कैरोटिड आर्टरी में स्टेंट डालना बहुत मुश्किल था।”

डॉ. खन्ना ने कहा, “हमने सेलेब्रल प्रोटेक्शन के साथ कैरोटिड एंजियोप्लास्टी की। हमने फाईन मैश स्टेंट का इस्तेमाल किया, जो भारत में ब्रेन आर्टरी की एंजियोप्लास्टी के लिए आधुनिक तकनीक है। इस तकनीक का इस्तेमाल सबसे पहले यूरोप में किया गया था, हाल ही में भारत में इसकी शुरुआत हुई है। यह हमारे द्वारा किया गया पहला ऑपरेटिव केस है।”

उन्होंने कहा, “कवर्ड स्टेंट के विपरीत फाईन मैश स्टेंट अपने अंदर से खून तो बहने देता है, लेकिन कॉलेस्ट्रॉल नहीं। इसलिए दिमाग में स्ट्रोक पैदा करने वाला क्लॉट दिमाग तक नहीं पहुंच पाता। कैरोटिड एंजियोप्लास्टी की इस प्रक्रिया में तकरीबन 25 मिनट का समय लगता है।”

सर्जरी के बाद मरीज इंदिरा शर्मा ने कहा, “डॉ. खन्ना की वजह से मुझे नया जीवन मिला है।”

डॉ खन्ना ने बताया, “कैरोटिड स्टनोसिस की प्रक्रिया ठीक वैसी ही होती है, जैसे दिल की धमनी में ब्लॉक हो जाता है। इसमें दिमाग की धमनी में कॉलेस्ट्रॉल जमने लगता है। यह कॉलेस्ट्रॉल दिमाग में जाकर स्ट्रोक का कारण बन सकता है। स्ट्रोक के 50 फीसदी मामले सफल कैरोटिड स्टेंटिंग के बाद होते हैं, क्योंकि पारम्परिक स्टेंट कॉलेस्ट्रॉल और प्लॉक को फिल्टर नहीं कर पाता। लेकिन इस आधुनिक तकनीक में इस्तेमाल किया जाने वाला फाईन मैश स्टेंट प्लॉक को दिमाग के अंदर नहीं जाने देता और भविष्य के लिए दिमाग को स्ट्रोक से सुरक्षित रखता है।”

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस


SHARE
Previous articleसुंदर सी की अगली फिल्म में काम करने को रोमांचित तमन्ना भाटिया
Next articleUS OPEN: सेमीफाइनल में निशिकोरी को हराकर फाइनल मेंं पहुंचे नोवाक
बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here