71 फीसद अभिभावक मानते हैं, बच्चों के लिए अच्छे हैं वीडियो गेम्स

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वीडियो गेम्स को लेकर 71 प्रतिशत अभिभावकों को लगता है कि यह उनके बच्चों के लिए अच्छे हैं। इससे उनपर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा, जबकि 44 प्रतिशत ने माना कि उन्होंने वीडियो गेम सामग्री को प्रतिबंधित करने का प्रयास किया है। एक नेट के शोध में यह जानकारी सामने आई है। अमेरिका में सीएस मोट्ट चिल्ड्रन्स हॉस्पिटल नेशनल पोल ऑफ चिल्ड्रन्स हेल्थ के अनुसार, 86 प्रतिशत माता-पिता इस बात से सहमत हैं कि किशोर अवस्था के बच्चे बहुत अधिक समय गेमिंग को देते हैं। अभिभावकों ने लड़कियों की तुलना में किशोर लड़कों के लिए बहुत अलग गेमिंग पैटर्न की जानकारी दी।

लड़कियों की तुलना में लड़कों के माता-पिता (दोगुना से अधिक) ने कहा कि उनके लड़के प्रतिदिन गेम खेलते हैं। वे तीन से अधिक घंटे गेम खेलने में बिताते हैं।

मिशिगन यूनिवर्सिटी की पोल को-निदेशक गैरी फ्रीड ने कहा, “हालांकि कई अभिभावकों ने गेम्स को अपने बच्चों के लिए अच्छा बताया है, वहीं उन्होंने अधिक समय तक गेंमिग को लेकर नकारात्मक प्रभाव की बात भी कही है।”

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस

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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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