‘6 अंडरग्राउंड’ बिना सुपरपावर के सुपर ह्युमन की कहानी : मिलानी लौरेंट

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आगामी नेटफ्लिक्स फिल्म ‘6 अंडरग्राउंड’ में खतरनाक स्टंट करने वाली अभिनेत्री मिलानी लौरेंट का कहना है कि यह फिल्म सुपर ह्युमन के बारे में है, जिनके पास कोई सुपरपावर नहीं है। साल 2009 में हॉलीवुड में डेब्यू करने वाली लौरेंट ब्लॉकबस्टर फिल्म ‘इनग्लोरियस बास्टर्डस’ में पहली बार नजर आई थी। उन्होंने यहां संवाददाताओं से कहा, “जब मैंने स्क्रिप्ट पढ़ी तो मैं काफी उत्साहित थी। कागज पर 2 (उनका किरदार) साफ उभर कर आ रही थी और वह सभी एक्शन दृश्यों में थी, क्योंकि वह उन लोगों में से थी, जिन्हें लड़ना था और बंदूकें चलानी थी।”

उन्होंने आगे कहा, “फिल्म में 10 मिनट के बाद मेरा किरदार नहीं टिक पाता अगर उसमें 5 (एक किरदार)नहीं होता। और अगर उसमें मैन्युअल (जिन्होंने 3 का किरदार निभाया है) नहीं होते तो मेरा किरदार दिलचस्प नहीं होता। फिल्म में बेन ने ढेर सारी भावनाओं को उजागर किया है। मेरा मानना है कि लोगों ने कई सारी एक्शन फिल्में देखी होंगी, जिसमें सुपरहीरो रहते हैं। लेकिन यह ऐसी फिल्म है जिसमें सुपर ग्रेट ह्युमन हैं, और वो भी बिना सुपरपावर के।”

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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