अगले कुछ वर्षो में 56 नए हवाई अड्डे काम करने लगेंगे : सुरेश प्रभु

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केन्द्रीय वाणिज्य और उद्योग तथा नागर विमानन मंत्री सुरेश प्रभु ने कहा कि अगले कुछ वर्षो में 56 नए हवाई अड्डे काम करने लगेंगे। नई दिल्ली में ग्लोबल लॉजिस्टिक्स शिखर सम्मेलन में उद्घाटन भाषण देते हुए प्रभु ने कहा कि लॉजिस्टिक्स और कनेक्टीविटी में सुधार लाने के लिए सभी साझेदारों को एक साथ लाकर सही मंच तैयार किया जा सकता है जो अंतर-राज्यीय और अंतर्राष्ट्रीय व्यापार के प्रवाह में बढ़ोतरी के लिए महत्वपूर्ण है।

वर्ष 2019-20 में भारतीय लॉजिस्टिक्स उद्योग करीब 215 अरब अमेरिकी डॉलर का होगा, जो प्रति वर्ष दस प्रतिशत की दर से बढ़ रहा है। पिछले दशक में अथवा उसके बाद रेलवे, सड़कों, राजमार्गो, अंतदेर्शीय जलमार्गो, विमानन, बंदरगाहों और तटीय नौवहन में पर्याप्त सुधार हुआ है।

भारत की लॉजिस्टिक्स परफॉर्मेमंस इंडेक्स (विश्व बैंक द्वारा तैयार) रैंकिंग में सुधार आया है, जो 2014 में 54 थी और 2016 में 35 हो गई।

इन मामलों पर जागरुकता निर्माण और बेहतर समझ विकसित करने के लिए वाणिज्य विभाग ने फिक्की और विश्व बैंक समूह के साथ 5 और 6 अप्रैल को इस शिखर सम्मेलन का आयोजन किया है।

शिखर सम्मेलन में विश्व भर के विशेषज्ञों, शिक्षाविदों, सरकारी अधिकारियों और निजी क्षेत्र तथा उद्योग के प्रतिनिधियों को उपरोक्त मुद्दों पर विचार करने का अवसर मिलेगा।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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