दिल्ली के स्वायत्त सुपर स्पेशियलिटी अस्पतालों में 50 फीसदी डॉक्टर कम

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राष्ट्रीय राजधानी के दो स्वायत्त सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल राजीव गांधी सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल और जनकपुरी सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल डॉक्टरों की 50 फीसदी से अधिक कमी का सामना कर रहे हैं। इससे मरीजों को इलाज के लिए लंबा इंतजार करना पड़ रहा है।

दोनों स्वायत्त अस्पताल विश्व स्तरीय बुनियादी ढांचे से परिपूर्ण हैं, मगर नीतिगत तौर पर सुविधा मुहैया नहीं करा पा रहे हैं। दोनों अस्पतालों के प्रबंधन के अनुसार सरकार ने स्वायत्त और सरकार द्वारा संचालित अस्पतालों के लिए अलग-अलग नीतियां बनाई हैं।

दिल्ली सरकार के पास तीन सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल हैं, जिनमें से दो स्वायत्त हैं जबकि जी.बी. पंत अस्पताल दिल्ली सरकार द्वारा चलाया जा रहा है।

डिप्टी मेडिकल सुपरिटेंडेंट छवी गुप्ता के अनुसार, राजीव गांधी सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल (आरजीएसएसएच) पूर्वी दिल्ली में 180 बेड की क्षमता वाला अस्पताल है, जो कार्डियोलॉजी, पल्मोनोलॉजी, गैस्ट्रोइंट्रोलॉजी, जीआई सर्जरी, यूरोलॉजी, रेडियोलॉजी और सीपीवीएस से युक्त है। उन्होंने बताया कि यहां आईसीयू, सीसीयू, ब्लड बैंक, पेन क्लिनिक और स्लीप लैब भी मौजूद हैं।

उन्होंने बताया, “हमारे पास दो चिकित्सा अधिकारी, एक ब्लड बैंक अधिकारी और फैकल्टी चिकित्सक हैं। डॉक्टरों के लगभग 50 से 60 फीसदी पद खाली हैं। डॉक्टरों को नियमित रूप से भर्ती किया जा रहा है।”

जब आईएएनएस ने अस्पताल का दौरा किया, तो ओपीडी में लोगों की बड़ी संख्या देखने को मिली, जबकि अस्पताल के अन्य ब्लॉक और 13 एकड़ के भूखंड पर फैला क्षेत्र खाली पड़ा हुआ था।

गुप्ता ने कहा, “मुझे लगता है कि मौजूदा संख्या के साथ भी हम अच्छा कर रहे हैं। हम नियमित रूप से ओपीडी में 1,500-2,000 मरीजों का इलाज कर रहे हैं। यहां के डॉक्टर खुशी से काम कर रहे हैं और अधिक प्रयास कर रहे हैं। अस्पताल में रोजाना कम से कम 25 मरीज कैथ लैब में आते हैं।”

गुप्ता ने कहा कि अस्पताल में सभी उपकरण और बुनियादी ढांचा है, लेकिन अब यह डॉक्टरों की भर्ती पर अपना ध्यान केंद्रित कर रहा है।

उन्होंने कहा, “अस्पताल में प्रति दिन लगभग पांच से आठ छोटी और बड़ी सर्जरी होती हैं।”

गुप्ता ने कहा कि इस अस्पताल को 650 बेड का बनाने की योजना है। पहले चरण में 250 बेड की मंजूरी है, जिसमें से 180 पहले से ही मौजूद हैं।

इसके अलावा जनकपुरी सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल (जेएसएसएच) में भी कुछ इसी तरह की तस्वीर दिखाई दी।

सूत्रों के अनुसार, अस्पताल में प्रतिदिन ओपीडी में लगभग 1,800 मरीज आते हैं, लेकिन यहां भी डॉक्टरों के बहुत सारे पद खाली हैं, जिनमें फैकल्टी के 70 फीसदी से अधिक डॉक्टर और विशेषज्ञ के पद खाली हैं। इसके साथ ही अस्पताल में कोई सर्जिकल डॉक्टर भी नहीं हैं।

जेएसएसएच के चिकित्सा अधीक्षक अशोक कुमार के अनुसार, अस्पताल ने सर्जिकल डॉक्टरों की नियुक्ति के लिए फाइल दिल्ली सरकार को भेज दी है। उन्होंने बताया कि काफी सारी रिक्तियों को भरने के लिए अस्पताल विज्ञापन दे रहा है, लेकिन वे डॉक्टरों को खोजने में सक्षम नहीं हो पा रहे हैं।

कुमार ने कहा, “हम डॉक्टरों के पदों के लिए सक्षम नहीं हैं। सोसायटी अस्पतालों का वेतन ढांचा सरकारी डॉक्टरों या निजी डॉक्टरों की तुलना में कम है।”

स्वायत्त और सरकारी अस्पताल के बीच अंतर को स्पष्ट करते हुए उन्होंने कहा, “स्वायत्त वर्ग में खरीद, भर्ती और कामकाज के मामले में स्वायत्तता दी जाती है।”

राजीव गांधी अस्पताल के सूत्रों के मुताबिक, मरीजों को इलाज के लिए एक साल तक इंतजार करने के लिए कहा जाता है, जिससे उन्हें काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस

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