बिहार में ट्रेन की चपेट में आने से 5 लोगों की मौत

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बिहार के कैमूर जिले के भभुआ रोड रेलवे स्टेशन पर शुक्रवार शाम एक एक्सप्रेस ट्रेन की चपेट में आने से तीन महिला सहित पांच लोगों की मौत हो गई जबकि तीन अन्य लोग घायल हो गए। पुलिस के एक अधिकारी ने बताया कि वाराणसी-रांची इंटरसिटी एक्सप्रेस भभुआ रोड स्टेशन पर आकर खड़ी हुई थी। एक्सप्रेस में अधिक भीड़ होने के कारण कई लोग प्लेटफॉर्म पर नहीं उतरकर दूसरी तरफ उतर गए और बिना देखे रेलवे पटरी पार करने लगे।

इसी बीच हाबड़ा लालकुआं साप्ताहिक एक्सप्रेस पहुंच गई और कई लोग इसकी चपेट में आ गए। भभुआ रोड स्टेशन के स्टेशन प्रबंधक सरोज सिंह ने बताया कि घटनास्थल पर ही पांच लोगों की मौत हो गई।

सासाराम रेल पुलिस के पुलिस निरीक्षक पंकज प्रकाश ने बताया कि मृतकों में तीन महिलाएं शामिल हैं। घायलों को इलाज के लिए स्थानीय अस्पताल भेज दिया गया है, जहां दो की हालत गंभीर बनी हुई है।

उन्होंने बताया कि मृतकों में रोहतास जिले के तेलारी गांव निवासी साहिना परवीन (35), अफरीन (10) और करीना (15) शामिल हैं। ये तीनों एक ही परिवार की बताई जा रही हैं। दो मृतकों की पहचान अभी तक नहीं हुई हैं।घटनास्थल पर जिला प्रशासन और रेलवे के अधिकारी पहुंच गए हैं।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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