Jharkhand में कार ने खड़े ट्रक में मारी टक्कर, 4 की मौत

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झारखंड के पलामू जिले के छतरपुर थाना क्षेत्र में गुरुवार की रात एक तिलक समारोह से लौट रहे लोगों की कार और ट्रक की टक्कर में बिहार के चार लोगों की मौत हो गई। छतरपुर के अनुमंडल पुलिस अधिकारी (एसडीपीओ) शंभु कुमार सिंह ने बताया कि बिहार के नवीनगर के रहने वाले संजय प्रसाद (55) अपनी पुत्री की शादी का तिलक चढ़ाकर पलामू के शाहपुर गांव से लौट रहे थे, तभी छतरपुर के महिंद्रा पेट्रोल पंप के पास खड़े ट्रक से उनकी कार टकरा गई।

इस दुर्घटना में कार पर सवार दो लोगों की घटनास्थल पर ही मौत हो गई जबकि दो अन्य लोगों को घायल स्थिति में अस्पताल ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने दोनों को मृत घोषित कर दिया।

एसडीपीओ ने बताया कि मृतकों की पहचान संजय प्रसाद, सरयू प्रसाद, उमेश साव तथा संजय कुमार शामिल हैं। दुर्घटना के बाद सभी शवों को पोस्टमार्टम के लिए अस्पताल भेज दिया गया है। पुलिस पूरे मामले की छानबीन कर रही है।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस

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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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