नागालैंड पहुंची 3,400 वीवीपीएटी मशीनें, जानिए इसके बारे में !

0
36

चुनावी राज्य नागालैंड में कुल 3,400 वोटर वेरिफायबल पेपर ऑडिट ट्रेल मशीनें व केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सीएपीएफ) की 77 कंपनियां पहुंच चुकी हैं। एक निर्वाचन अधिकारी ने रविवार को यह जानकारी दी।

नागालैंड की 60 सदस्यीय विधानसभा के लिए 27 फरवरी को चुनाव होंगे और मतों की गणना 3 मार्च को होगी। मुख्य निर्वाचन अधिकारी अभिजीत सिन्हा ने कहा कि राज्य के सभी 2,196 मतदान बूथों पर वीवीपीएटी मशीनों को लगाया जाएगा। यह पहली बार है कि प्रिंटर से जुड़ी वोटिंग मशीनों का इस्तेमाल नागालैंड में हो रहा है।

आगामी विधानसभा चुनावों में सीएपीएफ की 281 कंपनियां सुचारु चुनाव प्रक्रिया सुनिश्चित करेंगी। शीर्ष मतदान अधिकारी ने कहा कि 77 कंपनियां राज्य में पहुंच गई हैं और इन्हें सभी जिलों में भेज दिया गया है।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस


SHARE
Previous articleराजनाथ सिंह ने कहा, कारीगर प्रतिभाओं को और पहचान व लोकप्रिय बनाने की जरूरत
Next articleपश्चिम बंगाल : खर्चा निकालने के लिए माकपा ने कार्यालय किराए पर दिया
बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here