World No Tobacco Day: जानें तंबाकू निषेध दिवस की कब से हुई शुरुआत, रोजाना हो जाती हैं तीन मौतें….

0

बीड़ी सिगरेट और अन्य तंबाकू उत्पादों का सेवन करने वाले लोग अपने जीवन के साथ खिलवाड़ करते हैं। अपने परिवार की जमा पूंजी को भी इलाज में फूंक देते हैं। तंबाकू के सेवन से होने वाल खतरे को लेकर लोगों को जागरुक करने के लिए अभियान चलाए जाते हैं। सरकार और स्वास्थ्य महकमे के साथ विभिन्न संस्थाएं  भी लोगों को जागरूक करती है। धूम्रपान की समस्या भारत के अलावा अन्य देशों में भी उभर कर सामने आई है।

इस बार कोरोना महामारी की वजह से विश्व तंबाकू निषेध दिवस को लेकर जागरुकता कार्यक्रमों का आयोजन संभव नहीं हो सकता है। इस वजह से विज्ञापन, फेसबुक, ट्विटर, रेडियो और सोशल मीडिया के जरिए धुम्रपान के खतरों के बारे में लोगों को जागरुक किया जाना है।

हर साल 31 मई को नो-टोबैको डे यानी विश्व तंबाकू निषेध दिवस मनाया जाता है। इस दिन तंबाकू के सेवन से होने वाले नुकसान से लोगों को जागरुक किया जाता है।

विश्व तंबाकू निषेध दिवस हर साल एक थीम के अनुरूप मनाया जाता है। इस बार तंबाकू निषेध दिवस-2020 की थीम हटकर है। इस बार “युवाओं को इंडस्ट्री के हथकंडे से बचाना और उन्हें तंबाकू-निकोटीन के उपयोग से रोकना” नामक थीम पर ये दिवस मनाया जाएगा।

पहली बार विश्व तंबाकू निषेध दिवस को WHO ने मनाया था। इस दिवस की शुरुआत साल 1987 में विश्व स्वास्थ्य संगठन ने तंबाकू के सेवन से होने वाली बीमारियों की वजह से मृत्युदर में वृद्धि के मद्देनजर इसे महामारी का दर्जा दिया था। पहली बार 7 अप्रैल 1988 को WHO की एनीवर्सररी के दिन विश्व तंबाकू दिवस को मनाया गया था।

Read More….
कोरोना संकट: लॉकडाउन से बंद हो सकती हैं 7 लाख से ज्यादा छोटी दुकानें
पीएम मोदी ने देश के नाम लिखा खत, कोरोना संकट में मजदूरों की परेशानी पर जताया दुख

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here