इस साल 31 लाख छात्र/छात्राएं देंगे सीबीएससी परीक्षा

0
417

कक्षा 10 और 12 के 31 लाख से अधिक छात्र/छात्राएं इस साल बोर्ड परीक्षाओं में शामिल होंगे, जिनके लिए देश-विदेश में करीब 5,000 परीक्षा केंद्र बनाए गए हैं। केंद्रीय माध्यमिक परीक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने बुधवार को यह जानकारी दी।

सीबीएसई के मुताबिक कक्षा 10 के लिए 18.27 लाख और कक्षा 12 की परीक्षाओं में शामिल होने के लिए 12.87 लाख छात्र/छात्राओं ने पंजीकरण कराया है।

छात्रों पर दवाब कम करने के लिए बोर्ड ने घोषणा की है कि 33 फीसदी अधिक आंतरिक विकल्प प्रश्न होंगे और वह ‘रचनात्मक जवाबों’ को अधिक ‘प्राथमिकता’ देगी।

सीबीएसई ने यह भी कहा कि वह नतीजों की घोषणा पिछले साल से एक सप्ताह पहले करने की कोशिश में जुटी है।

तीन लाख से अधिक लोग परीक्षाओं की निगरानी करेंगे, जिसमें अधीक्षक, पर्यवेक्षक और नोडल अधिकारी शामिल होंगे।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस


SHARE
Previous articleवैलेंटाइन डे पर रोपोसो ने पेश किए दो वीडियो फिल्टर
Next articleडरबन टेस्ट : श्रीलंका ने दक्षिण अफ्रीका को 235 रन पर समेटा
बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here