श्रीलंका विस्फोटों में 8 भारतीयों सहित 290 मरे, मुस्लिम संगठन हमलों का दोषी

0
92

श्रीलंका में रविवार को ईस्टर के मौके पर हुए सिलसिलेवार बम विस्फोटों में मरने वालों की संख्या सोमवार को 290 तक पहुंच गई। इनमें आठ भारतीय शामिल हैं। इस बीच श्रीलंका ने इस हमले के लिए एक स्थानीय मुस्लिम संगठन को जिम्मेदार ठहराया है और कहा कि यह बड़ी खुफिया चूक है।

राष्ट्रपति मैत्रीपाला सिरिसेना ने इस बीच घोषणा की वे दूसरे देशों से सहयोग चाहते हैं ‘क्योंकि खुफिया रिपोर्ट ने स्थानीय आतंकवादियों के साथ ही विदेशी आतंकवादियों के शामिल होने की बात कही है।’

कोलम्बो में पुलिस ने पेट्टा के मुख्य बस स्टेशन से सोमवार को 87 डोटेनेटर बरामद किए। इसके अलावा सुरक्षा बल जब एक बम को निष्क्रिय कर रहे थे तब वह सेंट एंथनी चर्च के समीप फट गया जिससे इलाके में अफरा-तफरी मच गई। भंडारनायके अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे के पास भी एक बम मिला जिसे निष्क्रिय किया गया।

रविवार को हुए हमले में कम से कम 500 लोग घायल हो गए जिसमें से कई की हालत गंभीर है।

अभी तक इस हमले की जिम्मेदारी किसी ने नहीं ली है। सरकार का कहना है कि इस हमले को श्रीलंकाई मुस्लिम ग्रुप नेशनल तौहीद जमात (एनटीजे) ने अंजाम दिया है।

स्वास्थ्य मंत्री राजिथा सेनारत्ने ने मीडिया से कहा, “एनटीजे इसमें शामिल है। यह एक स्थानीय संगठन है। अभी हमें पता नहीं है कि क्या वे बाहरी लोगों से मिले हुए हैं। गिरफ्तार किए गए सभी लोग स्थानीय हैं। लेकिन, बिना किसी अंतर्राष्ट्रीय नेटवर्क के इस तरह के हमले को अंजाम नहीं दिया जा सकता।”

सेनारत्ने ने कहा कि यह सुनियोजित हमले ‘पूर्णतया खुफिया विफलता हैं।’ उन्होंने कहा कि पूर्व में सूचना होने के बावजूद इसे रोका नहीं जा सका। उन्होंने मांग की कि पुलिस महानिरीक्षक को इस्तीफा दे देना चाहिए।

सरकार ने कहा कि वह मंगलवार को सार्वजनिक श्रद्धांजलि सभा करेगी जिसमें मृतकों को श्रद्धांजलि दी जाएगी।

पूरे देश में स्कूल जहां बंद रहे वहीं सड़क पर कम ही लोग निकले। श्रीलंका शोकग्रस्त अवस्था में है।

अधिकारियों ने कहा कि हमले में 30 विदेशी नागरिकों की मौत हुई है जिसमें आठ भारतीय शामिल हैं। इनमें से पांच जनता दल-सेक्युलर (जेडी-एस) के कार्यकर्ता हैं जो बेंगलुरू में चुनाव संपन्न होने के बाद छुट्टी मनाने श्रीलंका गए थे।

इनकी पहचान शिवन्ना, के.जी. हनुमनथाराया, एम. रंगप्पा, के.एम. लक्ष्मीनारायण और लक्ष्मणा गौड़ा रमेश के रूप में हुई है। इससे पहले विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने रमेश, लक्ष्मी और नारायण चंद्रशेखर की मौत की पुष्टि की थी।

पुलिस ने कहा है कि उस वाहन को जब्त कर लिया गया है जिसमें संदिग्धों को एक जगह से दूसरे जगह पहुंचाया गया। इसके साथ ही उसने उस घर पर भी छापेमारी की है जिसे हमलावरों द्वारा इस्तेमाल किया गया था।

करीब दो दर्जन संदिग्धों को अब तक गिरफ्तार किया गया है।

कुछ सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर भी प्रतिबंध लगाया गया है जिससे गलत सूचना न फैल सके।

ईस्टर के मौके पर हुए आठ विस्फोटों में से सबसे पहले रविवार सुबह कोलंबो के तीन लक्जरी होटलों सिनेमन ग्रैंड, शांगरी-ला, किंग्सबरी और कोलंबो, नेगोंबो और बट्टिकालोआ स्थित चर्च में विस्फोट हुए।

इसके बाद दोपहर में, कोलंबो के देहिवाला में चिड़ियाघर के पास एक विस्फोट हुआ जिसमें दो लोगों की मौत हो गई और डेमाटोगोडा में एक आवासीय परिसर में एक और विस्फोट हुआ जिसमें तीन पुलिसकर्मियों की मौत हो गई।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस


SHARE
Previous articleतीसरे चरण में 15 राज्यों में आज होगा मतदान
Next articleभाजपा ने पूर्वी दिल्ली से गौतम गंभीर को बनाया प्रत्याशी
बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here