manipur में 287 करोड़ रुपये की ड्रग्स जब्त

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केंद्रीय मणिपुर के थौबल जिले में भारी मात्रा में ड्रग्स जब्त की गई है, जिसकी कीमत 287 करोड़ रुपये जताई गई है। असम राइफल्स के अधिकारियों ने गुरुवार को यह जानकारी दी। असम राइफल्स के एक अधिकारी ने कहा कि अर्धसैनिक बल के जवानों और मणिपुर पुलिस के जवानों ने गुप्त सूचना के आधार पर कार्रवाई करते हुए बुधवार रात थौबल जिले के कामू गांव में एक ठिकाने से 72 किलो ब्राउन शुगर बरामद की, जिसकी कीमत 287 करोड़ रुपये आंकी गई है।

पुलिस और असम राइफल्स ड्रग पेडलर्स की तलाश कर रहे हैं।

अधिकारियों ने कहा कि म्यांमार से ड्रग्स की तस्करी की गई थी, जो चार पूर्वोत्तर राज्यों (मिजोरम (510 किमी), अरुणाचल प्रदेश (520 किमी), मणिपुर (398 किमी) और नगालैंड (215 किमी) के साथ 1,643 किलोमीटर की सीमा साझा करता है।

ड्रग्स, हथियारों और अन्य चीजों की तस्करी पूर्वोत्तर क्षेत्र में अक्सर सीमाओं से होती है, खासकर म्यांमार से यह कार्य किया जाता है।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस

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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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